Indian Sucrose Ltd में गवर्नेंस को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कंपनी के सेक्रेटरियल ऑडिटर M/s Manoj Purbey & Associates ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ऑडिटर ने कंपनी पर जरूरी दस्तावेजों तक पहुंच न देने का आरोप लगाया है, जबकि कंपनी मैनेजमेंट ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है।
विवाद की जड़: क्या है पूरा मामला?
कंपनी के लिए मुश्किलें तब बढ़ गईं जब सेक्रेटरियल ऑडिटर M/s Manoj Purbey & Associates ने 27 अगस्त, 2026 से अपने पद को छोड़ने का ऐलान किया। ऑडिटर का कहना है कि उन्हें कंपनी के ओरिजिनल स्टैच्यूटरी रिकॉर्ड्स (Statutory Records) तक समय पर पहुंच नहीं दी गई, जिसके चलते वे Form MR-3 के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाने में असमर्थ थे।
मैनेजमेंट का पक्ष
इस्तीफे के बाद कंपनी बोर्ड ने एक आधिकारिक बयान जारी कर ऑडिटर के सभी दावों को पूरी तरह से गलत बताया है। कंपनी का कहना है कि उन्होंने ऑडिट प्रक्रिया में पूरा सहयोग दिया है और सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए थे। मैनेजमेंट का यह रुख और ऑडिटर का आरोप, दोनों के बीच के इस टकराव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Risk Indicator)
कॉर्पोरेट गवर्नेंस में इस तरह की खींचतान एक 'रेड फ्लैग' के समान है। सेक्रेटरियल ऑडिटर का काम कंपनी द्वारा Companies Act और SEBI नियमों के पालन की पुष्टि करना होता है। ऐसे में ऑडिटर का यह गंभीर आरोप कंपनी के इंटरनल कंट्रोल्स (Internal Controls) की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाता है।
आगे क्या होगा?
अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी अपना अगला सेक्रेटरियल ऑडिटर कब और किसे नियुक्त करती है। यदि आने वाले समय में रेगुलेटरी जांच बढ़ती है या फाइलिंग में देरी होती है, तो यह शेयर के प्राइस पर नेगेटिव असर डाल सकता है।
