Indian Sucrose Limited की 35वीं AGM में कंपनी के ऑडिट रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। ऑडिटर्स ने अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर ऑडिट ट्रेल और बैंक स्टॉक स्टेटमेंट में अंतर जैसी कई खामियों की ओर इशारा किया है।
क्या हैं प्रमुख चिंताएं?
30 सितंबर, 2026 को हुई कंपनी की 35वीं AGM के दौरान मैनेजमेंट ने स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर ऑडिटर्स की सख्त टिप्पणियों का खुलासा किया। सबसे बड़ी समस्या अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर के 'ऑडिट ट्रेल' को लेकर है। इसके अलावा, कंपनी के इंटरनल बुक वैल्यू और बैंक को दिए गए स्टॉक स्टेटमेंट में भी भारी अंतर पाया गया है, जो सीधे तौर पर इंटरनल गवर्नेंस की कमजोरी को दर्शाता है।
अनुपालन (Compliance) में ढिलाई
ऑडिटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की ओर से जरूरी रेगुलेटरी फाइलिंग में भी देरी देखी गई है। इस लापरवाही के कारण कंपनी पर BSE की तरफ से जुर्माना भी लगाया गया है। निवेशकों के लिए यह एक 'रेड फ्लैग' है क्योंकि इससे कंपनी की पारदर्शिता और फाइनेंशियल हेल्थ की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
आगे क्या होगा?
कंपनी ने अपनी AGM में FY 2026 के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स को अपनाने, डायरेक्टर Geeta Sharma की दोबारा नियुक्ति और M/s SSVS & Co. को दोबारा स्टैच्युटरी ऑडिटर नियुक्त करने जैसे 6 प्रस्ताव रखे। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि मैनेजमेंट इन फाइनेंशियल खामियों को दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है। अगले कुछ दिनों में आने वाली वोटिंग रिजल्ट्स और भविष्य की फाइलिंग्स से स्पष्ट होगा कि कंपनी इन इंटरनल कंट्रोल की कमियों को कैसे सुलझाती है।
