India Tourism Development Corporation (ITDC) ने FY26 के लिए **₹2.95** प्रति शेयर के डिविडेंड का ऐलान किया है। कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़कर **₹84.02 करोड़** हो गया है, लेकिन रेगुलेटरी स्क्रूटनी और इंटरनल कंट्रोल की कमियों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
डिविडेंड और मुनाफे का गणित
कंपनी ने FY26 में शानदार परफॉर्मेंस दिखाते हुए अपने नेट प्रॉफिट को पिछले साल के ₹81.80 करोड़ से बढ़ाकर ₹84.02 करोड़ तक पहुँचा दिया है। हालांकि, स्टैंडअलोन रेवेन्यू में गिरावट देखी गई है, जो पिछले साल के ₹565.75 करोड़ से घटकर ₹527.43 करोड़ पर आ गया है। इस मुनाफे के बूते कंपनी ने ₹25.30 करोड़ के कुल आउटफ्लो के साथ ₹2.95 प्रति शेयर डिविडेंड की सिफारिश की है।
गवर्नेंस और रेगुलेटरी संकट
अच्छे नतीजों के बीच, ITDC के लिए गवर्नेंस से जुड़ी चुनौतियां सिरदर्द बनी हुई हैं। कंपनी को BSE और NSE की ओर से बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की कमी और कमिटी के गलत गठन के लिए पेनाल्टी लगाई गई है। हालांकि, कंपनी ने खुद को सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज (CPSE) बताते हुए इन पेनाल्टी से माफी की गुहार लगाई है।
ऑडिटर्स की चेतावनी और जोखिम
ऑडिट रिपोर्ट में कई गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं:
- इंटरनल कंट्रोल: MSME वेंडर्स को समय पर पेमेंट न करने और एसेट रिकॉर्ड-कीपिंग में कमियां पाई गई हैं।
- मुनाफे पर सवाल: CAG (Comptroller and Auditor General) ने प्रॉफिट में ₹2.16 करोड़ के ओवरस्टेटमेंट को पकड़ा है, जो प्रोविडेंट फंड ट्रस्ट में कमी से जुड़ा है।
- देनदारियां: कंपनी के सिर पर ₹1,092.82 करोड़ की कॉन्टिजेंट लायबिलिटीज (Contingent Liabilities) और कानूनी मामले लटके हुए हैं।
निवेशकों के लिए आगे का रास्ता
अगली बड़ी तारीख 22 सितंबर, 2026 है, जब कंपनी की 61वीं AGM आयोजित होगी। निवेशकों को यह देखना होगा कि बोर्ड इन रेगुलेटरी पेनाल्टीज से कैसे निपटता है और ऑडिटर्स द्वारा उठाई गई इंटरनल कंट्रोल की समस्याओं को सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
