Ind Agiv Commerce: मुसीबत में फंसी कंपनी, दोबारा रिजल्ट फाइलिंग और लाखों के कर्ज ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Ind Agiv Commerce: मुसीबत में फंसी कंपनी, दोबारा रिजल्ट फाइलिंग और लाखों के कर्ज ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

Ind Agiv Commerce Ltd ने Q1 FY27 के अपने फाइनेंशियल रिजल्ट्स फिर से फाइल किए हैं। रिपोर्ट में ऑडिटर ने अकाउंटिंग सिस्टम की खामियों और **₹17.88 लाख** के बकाया सरकारी टैक्स पर सवाल खड़े किए हैं।

क्या है मामला?

Ind Agiv Commerce ने जून तिमाही के लिए रिवाइज्ड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का कहना है कि यह केवल प्रक्रियात्मक बदलाव है और वित्तीय आंकड़ों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। कंपनी को स्टैंडअलोन आधार पर ₹10.76 लाख और कंसोलिडेटेड आधार पर ₹11.49 लाख का नेट लॉस हुआ है। हैरानी की बात यह है कि कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू जीरो रहा है।

ऑडिटर की कड़ी चेतावनी

ऑडिटर ने अपनी 'क्वालिफाइड ओपिनियन' (Qualified Opinion) में कंपनी के गवर्नेंस और अकाउंटिंग सिस्टम की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के पास कोई सही ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर नहीं है और डेटा के लिए एक्सेल शीट का सहारा लिया जा रहा है, जिसमें 'ऑडिट ट्रेल' का अभाव है। इससे आंकड़ों की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

कर्ज और कानूनी विवादों का बोझ

कंपनी पर वित्तीय दबाव काफी गहरा है:

  • NPA संकट: Redfort Capital Finance Co. Pvt Ltd का ₹7.77 करोड़ का लोन NPA घोषित हो चुका है, जिस पर दिल्ली हाई कोर्ट में कानूनी प्रक्रिया जारी है।
  • रिस्ट्रक्चरिंग: Bajaj Finserv, Clix Capital और Neo Growth जैसे NBFCs का ₹8.35 करोड़ का कर्ज अभी रिस्ट्रक्चरिंग की प्रक्रिया से गुजर रहा है।
  • सरकारी बकाया: कंपनी पर PF, ESIC और TDS के मद में कुल ₹17.88 लाख का बकाया है, जिसमें से केवल TDS का हिस्सा ही ₹17.36 लाख है।

निवेशकों के लिए मुख्य रिस्क कंपनी की गिरती आर्थिक सेहत, कानूनी विवाद और अकाउंटिंग सिस्टम पर ऑडिटर का अविश्वास है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.