Ind Agiv Commerce: भारी वित्तीय संकट में कंपनी, ऑडिटर ने उठाए गंभीर सवाल

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AuthorNeha Patil|Published at:
Ind Agiv Commerce: भारी वित्तीय संकट में कंपनी, ऑडिटर ने उठाए गंभीर सवाल

Ind Agiv Commerce Ltd ने अपना वित्त वर्ष 2025-26 का एनुअल रिपोर्ट पेश किया है, जिसमें कंपनी के भविष्य को लेकर भारी अनिश्चितता जताई गई है। ऑडिट में कंपनी की नेट वर्थ पूरी तरह खत्म होने और SEBI नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई है।

बिगड़ती वित्तीय सेहत

कंपनी की कमाई में बड़ी गिरावट देखी गई है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की ऑपरेशनल रेवेन्यू गिरकर ₹282 लाख रह गई, जो पिछले साल ₹390 लाख थी। इसी दौरान कंपनी को ₹126 लाख का कंसोलिडेटेड नेट लॉस हुआ है।

ऑडिटर की चेतावनी

ऑडिटर ने 'क्वालिफाइड ओपिनियन' देते हुए साफ कहा है कि कंपनी का 'गोइंग कंसर्न' स्टेटस खतरे में है। इन्वेंटरी वैल्यूएशन और इंटरनल कंट्रोल में खामियों के चलते कंपनी के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर सवालिया निशान लग गए हैं। कंपनी की देनदारियां उसकी संपत्ति से कहीं ज्यादा हो चुकी हैं।

रेगुलेटरी और गवर्नेंस की मार

कंपनी ने SEBI के (LODR) नियमों का पालन नहीं किया है, जिसके कारण प्रमोटर्स के शेयर फ्रीज कर दिए गए हैं। इतना ही नहीं, कंपनी ने अनिवार्य 'Structured Digital Database' (SDD) को मेंटेन करने में भी चूक की है और AOC-XBRL व MGT-7 जैसे महत्वपूर्ण फॉर्म फाइल करने में देरी की है।

फंड जुटाने की कोशिश

इन तमाम मुश्किलों के बीच, बोर्ड ने 20,56,965 नए शेयर ₹29 प्रति शेयर (जिसमें ₹19 का प्रीमियम शामिल है) के भाव पर जारी करने को मंजूरी दी है। इस प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए कंपनी ₹5.97 करोड़ जुटाकर अपनी लिक्विडिटी की समस्या को सुलझाने की कोशिश कर रही है।

निवेशकों के लिए अलर्ट: कंपनी पर कर्ज डिफॉल्ट का भी खतरा मंडरा रहा है। जब तक मैनेजमेंट इंटरनल कंट्रोल्स और रेगुलेटरी फाइलिंग को दुरुस्त नहीं करता, तब तक स्थिति चिंताजनक बनी रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.