IMP Powers Ltd ने सितंबर तिमाही के लिए **₹7.68 करोड़** का नेट प्रॉफिट जारी किया है। हालांकि, कंपनी के लिए चुनौतियां कम नहीं हैं क्योंकि ऑडिटर्स ने 'क्वालिफाइड ओपिनियन' (Qualified Opinion) दिया है और कंपनी का लिक्विडेशन मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में अटका हुआ है।
मुनाफे के पीछे का सच
IMP Powers Ltd के नतीजों पर नजर डालें, तो कंपनी ने ₹37.30 करोड़ का रेवेन्यू और ₹7.68 करोड़ का नेट प्रॉफिट रिपोर्ट किया है। कंपनी का बेसिक EPS ₹8.89 रहा है। हालांकि, यह ऊपरी चमक निवेशकों को भ्रमित कर सकती है क्योंकि ऑडिटर्स ने कंपनी की वित्तीय सेहत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ऑडिटर्स की चेतावनी (Auditor's Qualification)
कंपनी के स्टैच्यूटरी ऑडिटर्स, B J S and Associates ने 'क्वालिफाइड ओपिनियन' दिया है। ऑडिटर्स का कहना है कि कंपनी की बैलेंस शीट में कई खामियां हैं:
- अनरिकॉन्सिल्ड बैंक बैलेंस: बैंक खातों का मिलान नहीं हो पाया है।
- इम्पेयरमेंट टेस्टिंग का अभाव: लंबे समय से प्रोडक्शन बंद होने के बावजूद एसेट्स की वैल्यूएशन की जांच नहीं की गई।
- आउटस्टैंडिंग रिसीवेबल्स: बकाया पेमेंट के लिए जरूरी प्रावधान (Provisions) नहीं किए गए हैं।
कानूनी पचड़ों में फंसी कंपनी
IMP Powers फिलहाल IBC के तहत लिक्विडेशन प्रोसेस से गुजर रही है। कंपनी को बिजनेस बेचने से ₹78 करोड़ की राशि मिल चुकी थी, लेकिन STCI Finance Limited द्वारा चुनौती दिए जाने के कारण यह सौदा अभी तक पूरा नहीं हो सका है। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है, जिससे निवेशकों का पैसा फंसने का खतरा बना हुआ है।
आगे की राह
फिलहाल, कंपनी के भविष्य का दारोमदार सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिका है। इसके अलावा, ऑडिटर्स द्वारा उठाई गई आपत्तियों का प्रबंधन किस तरह जवाब देता है, यह शेयरधारकों के लिए ट्रैक करना बहुत जरूरी होगा।
