IGC Industries के लिए सितंबर तिमाही बेहद निराशाजनक रही है। कंपनी की रेवेन्यू जीरो रही है और उसे **₹5.58 करोड़** का नेट लॉस हुआ है, वहीं कंपनी की टोटल एसेट्स **₹21.45 करोड़** से घटकर महज **₹1.77 करोड़** रह गई हैं।
बिगड़ते वित्तीय हालात (Financial Distress)
कंपनी ने 13 अक्टूबर, 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में अपने नतीजे पेश किए। कंपनी की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस तिमाही में कंपनी की कुल कमाई (Total Income) जीरो रही है। सितंबर तिमाही के ₹5.58 करोड़ के घाटे को जोड़ दें, तो इस फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में कंपनी को कुल ₹20.20 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है।
एसेट बेस का तेजी से गिरना
कंपनी की बैलेंस शीट बेहद दबाव में नजर आ रही है। मात्र छह महीने पहले, यानी 31 मार्च, 2026 को कंपनी की कुल एसेट्स ₹21.45 करोड़ थीं, जो अब सिमटकर सिर्फ ₹1.77 करोड़ रह गई हैं। कंपनी की इक्विटी शेयर कैपिटल ₹34.72 करोड़ है, लेकिन अन्य इक्विटी नेगेटिव में ₹33.47 करोड़ पर है, जिससे कंपनी की नेटवर्थ लगभग शून्य या नेगेटिव के करीब पहुंच गई है।
ऑडिटर्स की राय
स्टैचुटरी ऑडिटर 'Sarang Shivajirao Chavan and Associates' ने SRE 2410 स्टैंडर्ड्स के तहत इन नतीजों का लिमिटेड रिव्यू किया है। हालांकि ऑडिट रिपोर्ट में कोई खास 'क्वालिफिकेशन' नहीं है, लेकिन जो आंकड़े सामने आए हैं, वे कंपनी के कामकाज पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।
आगे क्या?
निवेशकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि कंपनी मैनेजमेंट इसे रिवाइव करने के लिए क्या योजना बनाता है। रेवेन्यू का न होना और बैलेंस शीट का तेजी से छोटा होना कंपनी की भविष्य की स्थिरता के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।
