IEC Education Ltd के लिए फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के नतीजे बेहद निराशाजनक रहे हैं। कंपनी ने कोई भी ऑपरेशनल रेवेन्यू नहीं कमाया है और इसे **₹251.53 लाख** का नेट लॉस हुआ है। ऑडिटर ने कंपनी के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
भारी वित्तीय संकट और ऑडिटर्स की चेतावनी
कंपनी ने अपनी एनुअल रिपोर्ट में यह साफ कर दिया है कि पूरा साल उनका बिजनेस ऑपरेशन ठप रहा। ऑडिटर्स ने कंपनी की फाइनेंशियल स्टेटमेंट पर 'Qualified Opinion' जारी किया है, जिसका सीधा मतलब है कि कंपनी के बही-खातों में बड़ी गड़बड़ियां हैं। सबसे बड़ी चिंता ₹2404.76 लाख के आउटस्टैंडिंग एसेट्स और ₹324.65 लाख के ट्रेड रिसीवेबल्स की रिकवरी को लेकर है। साथ ही, बिना किसी ठोस दस्तावेज के ₹327 लाख के बैड डेट्स को राइट-ऑफ करना मैनेजमेंट की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है।
BSE और SEBI की कार्रवाई
कंपनी पर रेगुलेटरी नियमों के पालन में ढिलाई बरतने का भी आरोप है। BSE ने ₹1.35 लाख और ₹0.52 लाख की पेनल्टी लगाई है। इसके अलावा, कंपनी ने MGT-15, MGT-14 और DIR-12 जैसे जरूरी फॉर्म्स फाइल नहीं किए, साथ ही इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को स्टेट्यूटरी डेटाबैंक में रजिस्टर करने में भी फेल रही है।
आगे की राह और रिस्क
फिलहाल, कंपनी का पूरा दारोमदार दिल्ली सरकार के एजुकेशन डिपार्टमेंट के साथ चल रहे सेटलमेंट प्रस्ताव पर टिका है। कंपनी मैनेजमेंट का दावा है कि वे कामकाज दोबारा शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जब तक विवाद नहीं सुलझता और पैसा रिकवर नहीं होता, तब तक निवेशकों के लिए रिस्क काफी ज्यादा बना हुआ है।
