Himalaya Food International ने अपने कर्ज के बोझ को कम करने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। कंपनी ने वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) के जरिए अपनी 92% देनदारियां चुका दी हैं और इस फाइनेंशियल ईयर के अंत तक पूरी तरह कर्ज मुक्त होने का लक्ष्य रखा है।
कर्ज से मुक्ति की रणनीति
कंपनी अपने बैंकिंग कंसोर्टियम के साथ वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) की प्रक्रिया के अंतिम चरण में है। मैनेजमेंट का लक्ष्य है कि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के खत्म होने से पहले बाकी बचा हुआ कर्ज भी पूरी तरह खत्म कर दिया जाए। इसके लिए कंपनी अपनी नॉन-कोर संपत्तियों और जमीनों को बेचकर कैश जुटाने की तैयारी कर रही है।
क्यों है यह अहम?
भारी-भरकम कर्ज का बोझ कम होने से कंपनी के बैलेंस शीट में मजबूती आएगी। इसका सीधा असर कंपनी के इंटरेस्ट एक्सपेंस (Interest Expense) पर पड़ेगा, जो भविष्य में मुनाफे को बढ़ाने में मददगार साबित होगा। कंपनी का लक्ष्य 2027 तक अपना पूरा ऑपरेशनल टर्नअराउंड हासिल करना है।
पुरानी चुनौतियों से बाहर निकलने की कोशिश
पिछले एक दशक में कंपनी को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जिसमें जॉइंट वेंचर पार्टनरशिप में विवाद और प्लांट में आग जैसी घटनाएं शामिल थीं। चेयरमैन और CEO Man Mohan Malik के अनुसार, अब कंपनी का ध्यान पुराने संकटों से निकलकर इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से तैयार करने और अपनी प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने पर है।
आगे का रास्ता
कंपनी अपग्रेडेड प्रोसेसिंग लाइन्स को चालू करने पर काम कर रही है, ताकि ग्लोबल एक्सपोर्ट मार्केट्स की सख्त जरूरतों को पूरा किया जा सके। हालांकि, निवेशकों के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि जमीन की बिक्री में देरी या प्रोसेसिंग प्लांट के काम में किसी तरह की रुकावट कंपनी के 2027 के लक्ष्यों को प्रभावित कर सकती है।
