Hexagon Nutrition Ltd की 33वीं AGM में मैनेजमेंट को तगड़ा विरोध झेलना पड़ा है। शेयरहोल्डर्स ने लीडरशिप और सैलरी से जुड़े अहम प्रस्तावों को खारिज कर दिया है, जिससे कंपनी के गवर्नेंस पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मैनेजमेंट के खिलाफ शेयरहोल्डर्स की नाराजगी
हाल ही में संपन्न हुई Hexagon Nutrition Ltd की 33वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में कंपनी मैनेजमेंट के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण रही। हालांकि कंपनी ने FY 2025-26 के फाइनेंशियल रिजल्ट्स और डिविडेंड जैसे सामान्य बिजनेस प्रस्तावों को पास करा लिया, लेकिन विवाद तब हुआ जब मैनेजमेंट द्वारा लाए गए स्पेशल प्रस्ताव फेल हो गए।
क्या है पूरा मामला?
मीटिंग में रेजोल्यूशन नंबर 7, 8, और 11 को 75% बहुमत नहीं मिल सका। इन प्रस्तावों में खास तौर पर:
- चेयरमैन और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर Arun Purushottam Kelkar की दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव शामिल था।
- प्रमुख लीडरशिप की सैलरी (Remuneration) बढ़ाने के प्रस्ताव थे।
निवेशकों के लिए क्यों है यह चिंता?
स्पेशल रेजोल्यूशन के लिए 75% वोट की जरूरत होती है। भारी मात्रा में शेयरहोल्डर्स का इसे न मानना यह संकेत देता है कि वे कंपनी के मौजूदा बोर्ड स्ट्रक्चर और पे-आउट पॉलिसी से खुश नहीं हैं। किसी चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति का फेल होना कॉर्पोरेट जगत में एक दुर्लभ और गंभीर स्थिति है।
अब आगे क्या?
निवेशकों को अब BSE पर आने वाली कंपनी की अगली फाइलिंग पर नजर रखनी चाहिए। क्या मैनेजमेंट इसके लिए कोई एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाएगा? या लीडरशिप संकट को सुलझाने के लिए क्या नया कदम उठाएगा, यह आने वाले समय में कंपनी के स्टॉक और गवर्नेंस के लिहाज से काफी अहम होगा।
