Haleos Labs Ltd के निवेशकों ने हाल ही में हुए पोस्टल बैलट में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स की सैलरी (Managerial Remuneration) बढ़ाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। हालांकि, कंपनी को कुछ अन्य मामलों में राहत मिली है।
क्या हुआ है कंपनी में?
28 अगस्त, 2026 को संपन्न हुए पोस्टल बैलट में Haleos Labs Ltd के सामने मिली-जुली स्थिति देखने को मिली है। एक ओर जहां स्पेशल रेजोल्यूशन के जरिए मैनेजमेंट की सैलरी बढ़ाने का प्रस्ताव फेल हो गया, वहीं दूसरी ओर कंपनी ने कुछ जरूरी प्रशासनिक फैसले पास करा लिए हैं।
प्रमुख फैसले:
- मंजूरी: सुदीप्ति गोपीनीदी (Mrs. Sudeepthi Gopineedi) को 5 साल के कार्यकाल के लिए 'होल-टाइम डायरेक्टर' के तौर पर दोबारा नियुक्त कर दिया गया है।
- राहत: कंपनी और उसकी सब्सिडियरी के बीच 'मटेरियल रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन' (Related Party Transactions) के प्रस्ताव को निवेशकों की हरी झंडी मिल गई है, जो फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए प्रभावी रहेंगे।
क्यों नाराज हैं निवेशक?
एग्जीक्यूटिव रिम्यूनरेशन का प्रस्ताव एक 'स्पेशल रेजोल्यूशन' था, जिसके लिए भारी बहुमत की जरूरत थी। इसे खारिज किए जाने का सीधा मतलब है कि निवेशक कंपनी के प्रस्तावित सैलरी स्ट्रक्चर से खुश नहीं हैं। बोर्ड और शेयरधारकों की राय में यह बड़ा अंतर निवेशकों के बढ़ते असंतोष को दर्शाता है।
अब आगे क्या?
मैनेजमेंट को अब अपनी गवर्नेंस स्ट्रैटेजी पर फिर से विचार करना होगा। संभव है कि कंपनी को सैलरी पैकेज को दोबारा तैयार करना पड़े या निवेशकों के साथ और चर्चा करनी पड़े। फिलहाल, ऑपरेशन्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन कंपनी की आगामी फाइलिंग्स पर नजर रखना जरूरी है क्योंकि सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव अभी बाकी है।
