HFCL Limited ने अपने QIP और प्रेफरेंशियल इश्यू से जुटाए फंड्स पर मॉनिटरिंग रिपोर्ट जमा की है। कंपनी ने ₹550 करोड़ के QIP फंड का ज्यादातर हिस्सा कर्ज चुकाने और वर्किंग कैपिटल में खर्च कर दिया है, जबकि अन्य निवेशों के लिए समय सीमा बढ़ाई गई है।
फंड का पूरा हिसाब-किताब
HFCL Limited ने CARE Ratings के जरिए अपनी मॉनिटरिंग एजेंसी रिपोर्ट फाइल की है। कंपनी ने कुल ₹1,105 करोड़ के फंड्स की जानकारी दी है, जिसमें ₹550 करोड़ का QIP (Qualified Institutions Placement) और ₹555 करोड़ का प्रेफरेंशियल इश्यू शामिल है। रिपोर्ट बताती है कि QIP से आया पैसा कंपनी ने मुख्य रूप से कर्ज चुकाने, वर्किंग कैपिटल और प्लांट मशीनरी में पूरी तरह इस्तेमाल कर लिया है।
क्यों बदली डेडलाइन?
प्रेफरेंशियल इश्यू के तहत जुटाए गए फंड का कुछ हिस्सा अभी खर्च होना बाकी है। इसमें खास तौर पर HFCL Advance Systems में ₹90 करोड़ का निवेश शामिल है। निवेशकों की सुरक्षा के लिए कंपनी ने इसके लिए नई डेडलाइन 31 दिसंबर 2026 तय कर दी है। डिफेंस सेक्टर में अपने बिजनेस को मजबूत करने के लिए मैनेजमेंट इस लिक्विडिटी को बेहद सावधानी से इस्तेमाल कर रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
हालांकि कंपनी ने फंड्स के इस्तेमाल में पारदर्शिता दिखाई है, लेकिन निवेशकों को अब आने वाली तिमाहियों पर नजर रखनी होगी। खासतौर पर Defence Manufacturing Facility में होने वाले कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) की रफ्तार को ट्रैक करना जरूरी है। अगर इन प्रोजेक्ट्स में और देरी होती है, तो यह ऑपरेशनल चुनौतियों का संकेत हो सकता है। फिलहाल, सब कुछ बोर्ड द्वारा तय किए गए लक्ष्यों के दायरे में है।
