Gujarat Toolroom Ltd अब आधिकारिक रूप से कॉरपोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में शामिल हो गई है। NCLT के आदेश के बाद, कंपनी की कमान अब अंतरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) इकबाल सिंह गांधी के हाथों में सौंप दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत NCLT ने Gujarat Toolroom Ltd के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। इस प्रक्रिया की शुरुआत 30 सितंबर 2026 से हो चुकी है। अब कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज का प्रबंधन और पूरा कंट्रोल आईआरपी (IRP) इकबाल सिंह गांधी करेंगे।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
यह कदम कंपनी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस में एक बड़ा बदलाव है। मौजूदा मैनेजमेंट की सारी शक्तियां फिलहाल निलंबित कर दी गई हैं। निवेशकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इस प्रक्रिया में अब कंपनी के अस्तित्व को बचाने और कर्जदारों (Creditors) के दावों को निपटाने पर जोर दिया जाएगा, जिससे शेयरहोल्डर्स के लिए अनिश्चितता बढ़ गई है।
आगे का रोडमैप
कंपनी ने 3 अक्टूबर 2026 को सार्वजनिक नोटिस (Form A) जारी किया था। लेनदारों को 17 अक्टूबर 2026 तक अपने क्लेम जमा करने थे। इस पूरी प्रक्रिया को 29 मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि समय रहते कोई ठोस रिजॉल्यूशन प्लान तैयार नहीं होता है या क्रेडिटर्स की समिति इसे मंजूरी नहीं देती है, तो कंपनी के सामने लिक्विडेशन (Liquidation) का बड़ा खतरा बना रहेगा।
