Goel Food Products Ltd की 30वीं AGM में सभी **6** प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई है। हालांकि, कंपनी की बोर्रोइंग (Borrowing) और लोन संबंधी नीतियों पर पब्लिक शेयरहोल्डर्स ने **98.67%** के भारी विरोध के साथ अपनी असहमति दर्ज की है।
AGM के नतीजे और निवेशकों का रुख
11 सितंबर, 2026 को आयोजित Goel Food Products Ltd की 30वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में मैनेजमेंट ने सभी 6 एजेंडा आइटम्स को पास करा लिया है। स्क्रूटिनाइजर अंकिता दत्ता (M/s. Mamta Binani and Associates) द्वारा प्रमाणित इन नतीजों के बाद कंपनी के पास अब बोर्रोइंग लिमिट और लोन से जुड़े नए नियमों को लागू करने की आधिकारिक अनुमति मिल गई है।
क्यों है तकरार?
कंपनी के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स और रश्मि गोयल की फिर से नियुक्ति के प्रस्ताव को 100% समर्थन मिला, लेकिन असली विवाद प्रस्ताव नंबर 3 से 6 के दौरान दिखा। ये प्रस्ताव कंपनी एक्ट की धारा 180(1)(c) के अनुपालन और लोन, गारंटी व सिक्योरिटीज की लिमिट बढ़ाने से संबंधित थे।
पब्लिक शेयरहोल्डर्स की बड़ी असहमति
आंकड़े बताते हैं कि मैनेजमेंट और पब्लिक नॉन-इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर्स के बीच एक गहरी खाई बन गई है। लोन और बोर्रोइंग से जुड़े इन प्रस्तावों के खिलाफ करीब 98.67% पब्लिक वोट डाले गए। यह साफ संकेत है कि रिटेल निवेशक कंपनी की भविष्य की लिवरेज (Leverage) और फाइनेंशियल लायबिलिटी मैनेजमेंट रणनीति को लेकर डरे हुए हैं।
अब आगे क्या?
कंपनी अब अपने नए फाइनेंशियल ढांचे और कैपिटल एलोकेशन के साथ आगे बढ़ने के लिए स्वतंत्र है। हालांकि, निवेशकों के लिए आने वाली क्वार्टरली फाइलिंग्स पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि यह तय करेगा कि कंपनी अपनी नई बोर्रोइंग लिमिट का इस्तेमाल किस तरह करती है। मैनेजमेंट और निवेशकों के बीच का यह भरोसा टूटना कंपनी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर एक बड़ा सवालिया निशान है।
