Godavari Biorefineries की 71वीं AGM में सभी **10** प्रस्ताव पास हो गए हैं, जिसमें MD की दोबारा नियुक्ति भी शामिल है। हालांकि, फाइलिंग से पता चलता है कि इंस्टीट्यूशनल निवेशकों ने एग्जीक्यूटिव सैलरी और डिपॉजिट जैसे मुद्दों पर भारी विरोध जताया है।
एजीएम में क्या हुआ?
हाल ही में संपन्न हुई 71वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में कंपनी ने अपने सभी 10 एजेंडा आइटम्स को मंजूरी दिलवा ली है। कंपनी के प्रमोटर्स, जिनके पास 3,24,00,110 शेयर हैं, ने हर प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया, जिससे इंस्टीट्यूशनल निवेशकों का विरोध बेअसर रहा।
क्यों है यह मामला गंभीर?
इंस्टीट्यूशनल निवेशकों का कड़ा रुख कंपनी के गवर्नेंस को लेकर चिंताएं पैदा करता है:
- MD का विरोध: कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर मिस्टर समीर एस. सोमैया की री-अपॉइंटमेंट और उनके सैलरी स्ट्रक्चर के खिलाफ 52.52% इंस्टीट्यूशनल वोटर्स ने विरोध जताया।
- वित्तीय नीतियां: चैरिटेबल फंड्स में योगदान और कंपनी द्वारा डिपॉजिट स्वीकार करने के प्रस्तावों पर 48.50% इंस्टीट्यूशनल निवेशकों ने असहमति दर्ज की।
लीडरशिप में क्या बदलाव?
AGM में कुछ महत्वपूर्ण नियुक्तियों पर मुहर लगी है:
- समीर एस. सोमैया 1 अप्रैल, 2027 से प्रभावी रूप से MD बने रहेंगे।
- सुहास गोडगे और दिनेश शर्मा को एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में नियुक्त और उनकी सैलरी तय की गई है।
निवेशकों के लिए जोखिम
मैनेजमेंट और इंस्टीट्यूशनल कैपिटल के बीच की यह खींचतान भविष्य में गवर्नेंस से जुड़े जोखिम बढ़ा सकती है। यदि यह असहमति बनी रहती है, तो रेगुलेटरी जांच का दायरा बढ़ सकता है या बड़े निवेशक शेयर में अपनी होल्डिंग कम कर सकते हैं। रिटेल निवेशकों को अब अगली तिमाही की रिपोर्ट्स और मैनेजमेंट की आगामी घोषणाओं पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
