Ganesh Consumer Products मुश्किल में है। CARE Ratings की हालिया रिपोर्ट में IPO प्रोजेक्ट्स में देरी और बोर्ड द्वारा तय खर्च की सीमा का उल्लंघन सामने आया है।
IPO फंड का स्टेटस
कंपनी ने कुल ₹130 करोड़ के IPO इश्यू में से अब तक ₹86.15 करोड़ का इस्तेमाल किया है। फिलहाल, ₹43.85 करोड़ अभी भी बैंक अकाउंट्स और फिक्स्ड डिपॉजिट्स में रखे हुए हैं। राहत की बात यह है कि कंपनी ने कर्ज चुकाने के लिए आवंटित ₹60 करोड़ का पूरा इस्तेमाल कर लिया है, लेकिन बाकी प्रोजेक्ट्स की रफ्तार धीमी बनी हुई है।
दार्जीलिंग यूनिट पर लटकी सुस्ती
रिपोर्ट के अनुसार, दार्जीलिंग स्थित भुने हुए चने के आटे (roasted gram flour) की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पर काम बहुत धीमा है। इसके लिए ₹45 करोड़ आवंटित किए गए थे, लेकिन अब तक सिर्फ ₹2.46 करोड़ ही खर्च हो पाए हैं।
गवर्नेंस पर उठे सवाल
सबसे गंभीर चिंता 'स्ट्रैटेजिक इनिशिएटिव्स' को लेकर है। कंपनी ने इस मद में ₹12.43 करोड़ खर्च किए हैं, जो बोर्ड द्वारा मंजूर ₹12 करोड़ की लिमिट से ज्यादा है। मॉनिटरिंग एजेंसी CARE Ratings ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है क्योंकि इसके लिए कोई नई मंजूरी नहीं ली गई थी।
अब आगे क्या?
बोर्ड ने अब फंड इस्तेमाल करने की समय सीमा को वित्तीय वर्ष 2027 तक बढ़ा दिया है। निवेशकों को सलाह है कि वे कंपनी के इंटरनल कंट्रोल्स और प्रोजेक्ट की गति पर नजर रखें। फिलहाल, अनयूटिलाइज्ड फंड का एक बड़ा हिस्सा AU Small Finance Bank की फिक्स्ड डिपॉजिट में है, जिस पर 7.10% सालाना ब्याज मिल रहा है, जो कंपनी को कुछ हद तक सहारा दे रहा है।
