Eyantra Ventures के लिए पहली तिमाही चुनौतीपूर्ण रही है। कंपनी का नेट लॉस बढ़कर **₹3.75 करोड़** हो गया है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह **₹3.43 करोड़** था। साथ ही, ऑपरेशनल रेवेन्यू भी फिसलकर **₹19.17 करोड़** पर आ गया है।
नतीजों पर एक नजर
Q1 FY27 में कंपनी का प्रदर्शन दबाव में दिखा है। जून 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल के ₹19.56 करोड़ से घटकर ₹19.17 करोड़ रह गया है। हालांकि मर्चेंडाइज बिक्री में ₹12.36 करोड़ का सुधार दिखा, लेकिन हॉस्पिटल सर्विसेज और फार्मेसी बिजनेस की सुस्ती ने ओवरऑल नतीजों पर असर डाला है।
कंपनी का बड़ा रीस्ट्रक्चरिंग प्लान
कंपनी अपने कामकाज को सुव्यवस्थित करने के लिए बड़े बदलाव कर रही है:
- Prismberry Technologies Merger: NCLT हैदराबाद ने Prismberry Technologies के विलय को मंजूरी दे दी है, जिसकी प्रभावी तारीख 1 अप्रैल 2026 तय की गई है।
- UAE इकाई की विदाई: कंपनी ने अपनी नॉन-ऑपरेशनल UAE सब्सिडियरी 'eYantra Ventures FZE' को बंद करने का फैसला लिया है।
- US विस्तार: हालांकि कंपनी ने मई 2025 में EYANTRA VENTURES INC के नाम से एक अमेरिकी इकाई बनाई थी, लेकिन अभी वह इनएक्टिव (inactive) है।
निवेशकों के लिए जोखिम और संकेत
कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करना है। नेट लॉस का लगातार बढ़ना ऑपरेशनल दिक्कतों को दर्शाता है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि Prismberry का मर्जर और UAE इकाई को बंद करने से कंपनी की लागत में कितनी कमी आती है। क्या ये कदम कंपनी को मुनाफे की राह पर ला पाएंगे, यह देखना अहम होगा।
