Dynamic Microsteppers के निवेशकों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू पूरी तरह से 'शून्य' रहा है, जबकि कंपनी का नेट लॉस बढ़कर **₹26.90 लाख** पर पहुंच गया है।
फाइनेंशियल हालत और चुनौतियों का विश्लेषण
कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जो आंकड़े जारी किए हैं, वे चिंताजनक हैं। पिछले साल ₹16 लाख का नुकसान हुआ था, जो इस बार बढ़कर ₹26.90 लाख हो गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी की नेटवर्थ पूरी तरह से खत्म (Eroded) हो चुकी है, जिसके चलते इस साल कोई भी डिविडेंड (Dividend) नहीं दिया जाएगा।
क्यों बढ़ी हैं निवेशकों की चिंताएं?
अभी कंपनी के पास कोई भी ऐसा बिजनेस आधार नहीं है जिससे पैसा आ सके। मैनेजमेंट का कहना है कि वे बिजनेस को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनके पास कोई ठोस प्लान, रेवेन्यू टारगेट या काम शुरू करने की कोई निश्चित समय-सीमा मौजूद नहीं है।
कंप्लायंस और बोर्ड में बदलाव
सिर्फ फाइनेंशियल ही नहीं, कंपनी रेगुलेटरी मोर्चे पर भी पिछड़ रही है:
- लिस्टिंग फीस: कलकत्ता और अहमदाबाद स्टॉक एक्सचेंज की लिस्टिंग फीस का भुगतान नहीं किया गया है।
- डीमैट होल्डिंग: प्रमोटर्स के शेयर अब भी पूरी तरह से डीमैटरियलाइज्ड (Dematerialised) नहीं हैं, जिसे पूरा करने की प्रक्रिया चल रही है।
- बोर्ड में फेरबदल: प्रीतिराज गुलाटी को एडिशनल डायरेक्टर नियुक्त किया गया है, जबकि गीता पांडुरंग सावंत ने इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के पद से रिटायरमेंट ले लिया है।
शेयरधारकों को अब मैनेजमेंट की तरफ से किसी ठोस बिजनेस प्लान और ऑपरेशनल रीस्ट्रक्चरिंग के ऐलान का इंतजार करना चाहिए। कंपनी की वायबिलिटी (Viability) फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
