Digjam Ltd ने सितंबर तिमाही में **₹1.36 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, लेकिन कंपनी के सामने 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
मुनाफे के पीछे का सच
Digjam Ltd के लिए यह तिमाही मिला-जुला असर लेकर आई है। कंपनी ने सितंबर तिमाही में ₹1.36 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को ₹1.74 करोड़ का घाटा हुआ था। वहीं, छमाही आधार पर देखें तो कंपनी ₹2.18 करोड़ के मुनाफे में रही है।
ऑडिटर की कड़ी चेतावनी
मुनाफे की खबर के बावजूद, कंपनी के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। ऑडिटर ने अपनी रिपोर्ट में 'मैटेरियल अनसर्टेनिटी' (Material Uncertainty) की बात कही है। कंपनी के ऊपर ₹19.72 करोड़ का वर्किंग कैपिटल डेफिसिट है, यानी कंपनी की करंट लायबिलिटीज उसके एसेट्स से काफी ज्यादा हैं, जिससे कैश फ्लो पर भारी दबाव बना हुआ है।
फैक्ट्री बंद और भविष्य की रणनीति
कंपनी ने 31 मार्च, 2025 को ही अपनी जामनगर स्थित एकमात्र मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को बंद कर दिया था। इन एसेट्स की वैल्यू फिलहाल ₹53.19 करोड़ आंकी गई है, जिसे कंपनी बेचने की तैयारी में है। मैनेजमेंट का मानना है कि इस बिक्री और एक प्रस्तावित 'स्कीम ऑफ अरेंजमेंट' से कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति संभल सकती है।
निवेशकों के लिए अपडेट
कंपनी ने अपने RTA (Registrar and Share Transfer Agent) को भी बदल दिया है। अब MCS Share Transfer Agent की जगह MUFG Intime India Private Limited कामकाज देखेगी। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि कंपनी अपने एसेट्स को कब तक बेच पाती है और रिस्ट्रक्चरिंग प्लान कैसे काम करता है, क्योंकि इसी पर कंपनी का अस्तित्व टिका है।
