Digjam Limited ने फाइनेंशियल ईयर **2025-26** के लिए शानदार आय दर्ज की है, जो बढ़कर **₹33.51 करोड़** हो गई है। हालांकि, कामकाज में सुधार के बावजूद, ऑडिटर ने कंपनी की सॉल्वेंसी और जामनगर प्लांट बंद होने के कारण 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नजर
Digjam Limited की 11वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में कंपनी ने FY 2025-26 के नतीजे पेश किए। कंपनी की टोटल इनकम पिछले साल के ₹18.40 करोड़ के मुकाबले काफी उछलकर ₹33.51 करोड़ पर पहुंच गई है। कंपनी ने अपने घाटे को भी कम किया है, जो अब केवल ₹0.98 करोड़ रह गया है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा ₹10.44 करोड़ था।
क्यों चिंता में हैं इन्वेस्टर्स?
टॉप-लाइन में सुधार के बावजूद कंपनी की नींव कमजोर दिख रही है। इंडिपेंडेंट ऑडिटर ने कंपनी के भविष्य पर अनिश्चितता जताई है। 31 मार्च 2026 तक, कंपनी की करंट लायबिलिटीज ₹43.52 करोड़ हैं, जबकि एसेट्स मात्र ₹21.60 करोड़ हैं। जामनगर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के बंद होने से कंपनी की ऑपरेशनल स्थिति पर गहरा असर पड़ा है।
कॉर्पोरेट बदलाव और रिस्क
कंपनी ने अक्टूबर 2025 में अपना रजिस्टर्ड ऑफिस गुजरात से तमिलनाडु शिफ्ट किया है। साथ ही, NCLT में एक मर्जर (Scheme of Arrangement) पेंडिंग है, जो कंपनी के पुनर्गठन (Restructuring) के लिए अहम है। इसके अलावा, कंपनी सेक्रेटरी की नियुक्ति न करने पर BSE और NSE को ₹3,540 प्रति एक्सचेंज का जुर्माना भी भरना पड़ा है।
निवेशकों को अब NCLT के फैसले और जामनगर प्लांट की संपत्तियों की बिक्री से मिलने वाली रकम पर पैनी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि कंपनी की उत्तरजीविता इन्हीं कदमों पर टिकी है।
