Dharti Proteins की 32वीं AGM में कंपनी ने एक डायरेक्टर से **₹100 करोड़** का अनसिक्योर्ड लोन लेने का प्रस्ताव रखा है, जिसे भविष्य में इक्विटी में बदला जा सकेगा। साथ ही, ऑडिटर्स ने कंपनी के इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल्स पर सवाल उठाए हैं, जिसे लेकर निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
भारी कर्ज और इक्विटी डायल्यूशन का रिस्क
Dharti Proteins Ltd की 32वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में कुल 13 प्रस्ताव पेश किए गए। कंपनी ने एक डायरेक्टर से ₹100 करोड़ का अनसिक्योर्ड लोन जुटाने की मंजूरी मांगी है। इस लोन की सबसे बड़ी बात यह है कि इसे बाद में इक्विटी शेयर्स में कन्वर्ट किया जा सकेगा। यह कदम मौजूदा शेयरधारकों के लिए 'डायल्यूशन रिस्क' पैदा करता है, जिससे निवेशकों की हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है।
गवर्नेंस पर उठे सवाल
कंपनी के सामने एक बड़ी चुनौती ऑडिटर्स की रिपोर्ट है। फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए स्टैच्युटरी ऑडिटर्स ने कंपनी के 'इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल्स' पर 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' (Disclaimer of Opinion) दिया है। यह एक गंभीर गवर्नेंस फ्लैग है, जो बताता है कि कंपनी के सिस्टम में पारदर्शिता और नियंत्रण की कमी है। हालांकि मैनेजमेंट का कहना है कि वे इस कमी को सुधारने की दिशा में काम कर रहे हैं।
AGM में और क्या हुआ खास?
लोन प्रस्ताव के अलावा, मीटिंग में कई अहम बदलाव किए गए:
- FY26 के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स को अपनाया गया।
- सुभांगी जेनिफर, पूर्वा जैन, और चित्रा नरनीवाल को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया।
- कर्णिक शशांकन पिल्लई को नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई।
- कंपनी के ऑब्जेक्ट क्लॉज में बदलाव और नए मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन को मंजूरी दी गई।
निवेशकों के लिए चेतावनी
फिलहाल, निवेशकों को वोटिंग रिजल्ट्स का इंतजार करना चाहिए जो अगले 2 कार्य दिवसों में सामने आएंगे। मुख्य रिस्क ऑडिटर्स की प्रतिकूल टिप्पणी है, जिसे सुधारना मैनेजमेंट के लिए एक बड़ी प्राथमिकता होगी। शेयरधारकों को सलाह है कि वे कंपनी के गवर्नेंस और भविष्य के फैसलों पर बारीकी से नजर बनाए रखें।
