Dharan Infra-EPC Limited की इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया जारी रहेगी। मुंबई NCLT ने कंपनी द्वारा अपनी इन्सॉल्वेंसी (CIRP) कार्यवाही को वापस लेने की याचिका खारिज कर दी है। Tata Capital के साथ समझौते के बावजूद कोर्ट ने इस मांग को नहीं माना।
इन्सॉल्वेंसी से बाहर निकलने की कोशिश नाकाम
मुंबई स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 16 अक्टूबर, 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए Dharan Infra-EPC की कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) को वापस लेने की याचिका को खारिज कर दिया है। कंपनी ने अपने क्रेडिटर्स, विशेषकर Tata Capital के साथ हुए सेटलमेंट का हवाला देते हुए बाहर निकलने की मांग की थी, जिसे ट्रिब्यूनल ने स्वीकार नहीं किया।
अब आगे क्या होगा?
इस फैसले के बाद यह स्पष्ट है कि कंपनी अभी भी इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के दायरे में बनी रहेगी। कंपनी का कामकाज अब पूरी तरह से नियुक्त किए गए इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) की देखरेख में चलेगा।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks to Watch)
निवेशकों को अब अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है। चूंकि कोर्ट ने द्विपक्षीय समझौते को आधार मानकर राहत देने से इनकार कर दिया है, इसलिए अब कंपनी को स्टैंडर्ड IBC प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसमें अब लिक्विडेशन या नए रेजोल्यूशन प्लान की तलाश जैसी कड़े कदम शामिल हो सकते हैं।
नजर रखने वाली बातें
स्टेकहोल्डर्स को अब इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोफेशनल द्वारा जारी किए जाने वाले भविष्य के डिस्क्लोजर्स पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। CIRP का स्टेटस, नए रेजोल्यूशन प्लान की सबमिशन और कोर्ट-अप्रूव्ड सेटलमेंट की खबरें शेयर की वैल्यू के लिए सबसे महत्वपूर्ण होंगी।
