Deccan Gold Mines ने छत्तीसगढ़ के भालुकोना प्रोजेक्ट के लिए शुरुआती जियोलॉजिकल मॉडलिंग पेश की है। कंपनी को 40 लाख टन से ज्यादा निकल-इक्विवेलेंट अयस्क (ore) मिलने की संभावना है।
बड़े भंडार के संकेत
कंपनी ने 15 होल्स की ड्रिलिंग के आधार पर बताया है कि भालुकोना प्रोजेक्ट में 40 लाख टन से ज्यादा निकल-इक्विवेलेंट अयस्क मौजूद हो सकता है। यह रिपोर्ट मार्च 2026 से चल रहे 2,773 मीटर के डायमंड कोर ड्रिलिंग प्रोग्राम का हिस्सा है। फिलहाल, यह डेटा कुल 1.3 किलोमीटर के मिनरलाइज्ड कॉरिडोर के केवल 25% हिस्से को कवर करता है।
क्यों अहम है यह खोज?
निकेल और कॉपर जैसे जरूरी खनिजों की घरेलू खोज भारत के लिए बहुत मायने रखती है। कंपनी के मुताबिक, निकल-इक्विवेलेंट ग्रेड लगभग 0.24% है, जो इस साइट की क्षमता की शुरुआती पुष्टि करता है। अभी कंपनी ड्रोन मैग्नेटिक सर्वे के जरिए दक्षिण-पूर्व दिशा में और संभावनाओं को तलाश रही है।
निवेशकों के लिए सावधानी
निवेशकों को यह समझना चाहिए कि यह अभी केवल शुरुआती 'एक्सप्लोरेशन स्टेज' है। इसे आधिकारिक तौर पर 'मिनरल रिसोर्स' या 'रिजर्व' नहीं माना जा सकता है। खनन की आर्थिक व्यवहार्यता (Economic Viability) अभी साबित होनी बाकी है और कंपनी के सामने प्रोजेक्ट डेवलपमेंट, सरकारी मंजूरी और ग्लोबल मेटल प्राइसेज की अस्थिरता जैसे रिस्क बने हुए हैं।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजरें बाकी 75% मिनरलाइज्ड कॉरिडोर की रिपोर्ट और दक्षिण-पूर्व ड्रिलिंग के नतीजों पर टिकी हैं। कंपनी के लिए अगली बड़ी चुनौती इस खोज को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार आधिकारिक रूप से 'मिनरल रिसोर्स' घोषित करना होगा।
