भालूकोना प्रोजेक्ट में क्या मिला?
कंपनी के अनुसार, 430 मीटर की स्ट्राइक लेंथ (strike length) पर 100 मीटर से ज़्यादा चौड़ा मिनरलाइज्ड कॉरिडोर मिला है, जो 200 मीटर से ज़्यादा की गहराई तक फैला हुआ है। खास बात यह है कि ड्रिल होल BJD-02 में 15 मीटर @ 0.31% Ni_Eq और एक हाई-ग्रेड 0.7 मीटर @ 1.29% Ni_Eq का इंटरसेप्ट (intercept) मिला है। वहीं, ड्रिल होल BJD-03 में 36 मीटर @ 0.23% Ni_Eq और BJD-04 में 6 मीटर @ 0.39% Ni_Eq के नतीजे आए हैं।
यह क्यों मायने रखता है?
ये नतीजे भालूकोना प्रोजेक्ट के जियोलॉजिकल मॉडल (geological model) को सही साबित करते हैं और 1,500 मीटर ड्रिलिंग के साथ कंपनी की ऑपरेशनल तेजी को दिखाते हैं। चौड़े डिस्सेमिनेटेड सल्फाइड ज़ोन (disseminated sulphide zones) की पुष्टि और जारी ड्रिलिंग प्रोग्राम, कंपनी की माइनिंग के लायक रिसोर्स (mineable resource) परिभाषित करने की दिशा में प्रगति की ओर इशारा करता है, जो प्रोजेक्ट की भविष्य की व्यवहार्यता (viability) के लिए बहुत ज़रूरी है।
आगे क्या?
फिलहाल ड्रिलिंग का काम जारी है और आगे भी एक्सप्लोरेशन एक्टिविटीज (exploration activities) की योजना है। शुरुआती चार होल के अलावा बाकी ड्रिल होल के एसे रिजल्ट्स का इंतजार है, जो प्रोजेक्ट के संभावित स्केल (scale) और आर्थिक व्यवहार्यता (economic viability) पर और ज़्यादा डेटा देंगे।
जोखिम (Risks)
यह याद रखना ज़रूरी है कि जियोलॉजिकल एक्सप्लोरेशन में स्वाभाविक रूप से अटकलें (speculative) शामिल होती हैं। भालूकोना प्रोजेक्ट की भविष्य की व्यवहार्यता लगातार एक्सप्लोरेशन सफलता और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य रिसोर्स परिभाषित करने पर निर्भर करेगी। आने वाले एसे रिजल्ट्स का बाज़ार की भावनाओं (market sentiment) पर भी असर पड़ सकता है।
