Cressanda Railway Solutions ने FY26 में **₹15.88 करोड़** का बड़ा नेट लॉस दर्ज किया है, वहीं रेवेन्यू में **50%** से ज्यादा की गिरावट आई है। कंपनी के ऑडिटर ने गंभीर सवाल उठाए हैं और SEBI की जांच के बीच कंपनी ने रेस्ट्रक्चरिंग का रास्ता चुना है।
बिगड़ते फाइनेंशियल हालात
कंपनी के प्रदर्शन में आई गिरावट काफी चौंकाने वाली है। FY26 में कंपनी को ₹15.88 करोड़ का नेट लॉस हुआ है, जबकि पिछले साल (FY25) कंपनी ₹0.32 करोड़ के मुनाफे में थी। कंपनी की कमाई का जरिया भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, रेवेन्यू सालाना आधार पर 52.6% घटकर महज ₹11.82 करोड़ रह गया है। इसका मुख्य कारण ईस्टर्न रेलवे का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होना और एक सब्सिडियरी में हिस्सेदारी बेचना रहा है।
गवर्नेंस और ऑडिट पर सवाल
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय ऑडिटर की रिपोर्ट है। ऑडिटर ने ₹76.78 करोड़ के फाइनेंशियल एसेट्स, लोन और एडवांस के लिए पर्याप्त डॉक्यूमेंटेशन न होने पर आपत्ति जताई है। साथ ही, कंपनी पर अनिवार्य 'एडिट लॉग' वाले अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल न करने का आरोप भी लगा है। इन सब के ऊपर SEBI की चल रही जांच कंपनी के लिए एक बड़ा संकट बनी हुई है।
कंपनी का नया प्लान
इस संकट से बाहर निकलने के लिए बोर्ड ने एक रेस्ट्रक्चरिंग प्लान पेश किया है:
- मास्टर माइंड एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचना।
- ग्रीन एनर्जी और ई-प्लेटफॉर्म से जुड़ी चार निष्क्रिय (dormant) सब्सिडियरीज को बंद करना।
- क्रेसंडा कंज्यूमर्स प्राइवेट लिमिटेड को पैरेंट कंपनी से अलग करना।
आगे क्या होगा?
कंपनी फिलहाल ईस्टर्न रेलवे कॉन्ट्रैक्ट विवाद को लेकर आर्बिट्रेशन का सामना कर रही है। हालांकि सिक्योरिटीज अपीलीय ट्रिब्यूनल (SAT) ने SEBI की जांच पर स्टे ऑर्डर दिया है, लेकिन निवेशकों को कंपनी के डॉक्यूमेंटेशन और रेगुलेटरी अपडेट्स पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
