Cranes Software International की हालिया AGM में कंपनी की गंभीर वित्तीय बदहाली का सच सामने आया है। ऑडिटर्स ने कंपनी की नेगेटिव नेट वर्थ और 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जबकि कंपनी कर्ज डिफॉल्ट और कानूनी विवादों में बुरी तरह फंसी है।
वित्तीय सेहत पर गंभीर संकट
कंपनी की हालिया एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) के दौरान जो रिपोर्ट्स सामने आई हैं, वे निवेशकों के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी को ₹14.39 करोड़ का भारी-भरकम नेट लॉस हुआ है। ऑडिटर्स ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि कंपनी की नेट वर्थ नेगेटिव हो चुकी है, जो इसके भविष्य को लेकर बड़ा जोखिम पैदा कर रही है।
क्यों घिरे हैं कंपनी के प्रमोटर्स?
AGM में शेयरधारकों ने ₹50.75 करोड़ के रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन को मंजूरी तो दे दी, लेकिन असली चिंता बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) द्वारा कंपनी और उसके प्रमोटर्स को 'विलफुल डिफॉल्टर' (Wilful Defaulter) घोषित करना है। कंपनी प्रोविडेंट फंड और इनकम टैक्स जैसी वैधानिक देनदारियों को पूरा करने में भी विफल रही है।
बड़े कानूनी और वित्तीय जोखिम
- पुराना कर्ज: UPS Capital Business Credit का कर्ज 2014 से बकाया है।
- बॉन्ड संकट: 2011 से विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड (FCCB) का रिडेम्पशन नहीं हुआ है।
- कानूनी जंजाल: कंपनी CBI चार्जशीट का सामना कर रही है, हालांकि कर्नाटक हाईकोर्ट ने फिलहाल इस पर रोक लगा रखी है।
- रेगुलेटरी जुर्माना: BSE द्वारा कंपनी पर बोर्ड कंपोजिशन न बनाए रखने और समय पर फाइलिंग न करने के चलते कई बार जुर्माना लगाया गया है।
आगे का रास्ता
मैनेजमेंट का दावा है कि कंपनी अभी भी 'IP-rich' है और Ed-Tech सेक्टर में दोबारा एंट्री की कोशिश कर रही है। हालांकि, मौजूदा वित्तीय हालात और अदालती कार्यवाही को देखते हुए निवेशकों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।
