City Online Services ने अपने पूरे बिजनेस को बेचने का औपचारिक प्रस्ताव रखा है। कंपनी लगातार घाटे में चल रही है और ऑडिट में भी गंभीर सवाल उठे हैं। इस फैसले पर 30 सितंबर, 2026 को होने वाली AGM में शेयरहोल्डर्स वोटिंग करेंगे।
कारोबार बेचने का बड़ा फैसला
लगातार गिरते प्रदर्शन और प्रतिस्पर्धा के बीच City Online Services Ltd ने अपने पूरे बिजनेस को बेचने या डिवेस्ट करने का मन बना लिया है। 14 अगस्त, 2026 को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है। हालांकि, अभी तक किसी खरीदार की पहचान नहीं हुई है और न ही डील की वैल्यू फाइनल हुई है। इसके लिए 30 सितंबर, 2026 को होने वाली 27वीं AGM में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी जरूरी होगी।
क्यों दबाव में है कंपनी?
कंपनी के फाइनेंशियल हेल्थ पर नजर डालें तो स्थिति काफी चिंताजनक है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी को ₹47.21 लाख का नेट लॉस हुआ है, जबकि पिछले साल कंपनी ₹3.51 लाख के मुनाफे में थी।
ऑडिट और रेगुलेटरी चिंताएं (Audit Risks)
कंपनी की बैलेंस शीट को लेकर ऑडिटर्स ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
- नेट वर्थ: कंपनी की नेट वर्थ पूरी तरह खत्म हो चुकी है और लायबिलिटीज एसेट्स से ज्यादा हो गई हैं।
- GST विसंगतियां: कंपनी द्वारा घोषित रेवेन्यू और GST फाइलिंग में ₹42.06 लाख का बड़ा अंतर पाया गया है।
- अनबिल्ड रेवेन्यू: 31 मार्च, 2026 तक कंपनी ने ₹18.88 लाख का अनबिल्ड रेवेन्यू दिखाया है।
- लोन विवाद: किसी संबंधित पक्ष (Related Party) को दिए गए अनधिकृत लोन पर भी रेगुलेटरी सवाल उठ रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है खतरा?
वर्तमान में निवेशकों के लिए अनिश्चितता का दौर है। सबसे बड़ा जोखिम यह है कि क्या कंपनी अपनी देनदारियों को कवर करने के लिए पर्याप्त वैल्यू पर डील कर पाएगी। साथ ही, रेगुलेटरी नॉन-कम्प्लायंस के कारण कंपनी कानूनी मुश्किलों में भी फंस सकती है। अब सबकी नजरें 30 सितंबर को होने वाली AGM पर टिकी हैं कि आगे का रास्ता क्या तय होता है।
