Bombay Talkies Ltd ने FY26 के नतीजों का ऐलान कर दिया है। कंपनी का नेट लॉस बढ़कर **₹16.86 लाख** हो गया है, साथ ही ऑडिटर्स ने भी कंपनी के कामकाज पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नजर
कंपनी के फाइनेंशियल ईयर 2026 के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। कंपनी का नेट लॉस जो पिछले साल ₹14.76 लाख था, वह अब बढ़कर ₹16.86 लाख पर पहुंच गया है। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू भी घटकर ₹8.70 लाख रह गया है, जो पिछले साल ₹14.64 लाख था। कंपनी की कुल इक्विटी भी घटकर ₹452.87 लाख हो गई है।
ऑडिटर्स की 'Qualified Opinion' का क्या मतलब?
कंपनी को इंडिपेंडेंट ऑडिटर्स की ओर से 'Qualified Opinion' मिला है, जो निवेशकों के लिए रेड फ्लैग है। ऑडिटर्स ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि कंपनी ने:
- IND AS-36 के तहत एसेट्स की इंपेयरमेंट टेस्टिंग नहीं की।
- डेफर्ड टैक्स लायबिलिटीज का सही हिसाब नहीं रखा।
- ट्रेड रिसीवेबल्स और एम्प्लॉई बेनिफिट्स की अकाउंटिंग में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं।
अब आगे क्या होगा?
नुकसान के बीच कंपनी ने अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। अब Bombay Talkies मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस से पूरी तरह बाहर निकल रही है और अपना ध्यान पूरी तरह से ट्रेडिंग और एक्सपोर्ट मार्केट की ओर लगाएगी। मैनेजमेंट का कहना है कि इस बदलाव से कंपनी के ऑपरेशंस पर कोई मटेरियल रिस्क नहीं है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को कंपनी के ऑडिट रिमार्क्स पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। इन्वेंट्री वैल्यूएशन और फाइनेंशियल एसेट्स की फेयर वैल्यू में IND AS-109 और IND AS-19 जैसे अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स का पालन न करना कंपनी के इंटरनल कंट्रोल सिस्टम पर सवाल उठाता है, जो शेयरधारकों के भरोसे को चोट पहुंचा सकता है।
