Blueblood Ventures ने वित्त वर्ष 2025-26 की अपनी 19वीं एनुअल रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कंपनी ने **₹3.26 लाख** का नेट प्रॉफिट दिखाया है। हालांकि, कंपनी पर साल 2022 से ट्रेडिंग सस्पेंशन लागू है और अब उस पर अनिवार्य रूप से डि-लिस्टिंग (Delisting) की तलवार भी लटक रही है।
मुनाफे के पीछे का सच
Blueblood Ventures Ltd ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए अपनी एनुअल रिपोर्ट पेश की है। कंपनी ने कुल ₹110.64 लाख के रेवेन्यू पर ₹3.26 लाख का मामूली नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल के ₹0.59 लाख के मुकाबले थोड़ा बेहतर है। हालांकि, यह चमक-धमक केवल कागजों तक सीमित है, क्योंकि कंपनी गंभीर गवर्नेंस चुनौतियों का सामना कर रही है।
क्यों मुसीबत में हैं शेयरहोल्डर्स?
कंपनी के शेयर 21 नवंबर, 2022 से ही BSE पर सस्पेंड चल रहे हैं। मुसीबत तब और बढ़ गई जब 19 दिसंबर, 2025 को BSE ने एक 'शो कॉज नोटिस' (SCN) जारी कर कंपनी को अनिवार्य रूप से डि-लिस्ट करने का प्रस्ताव रखा। इसका सीधा मतलब है कि मौजूदा शेयरहोल्डर्स के लिए अपने निवेश से बाहर निकलना नामुमकिन जैसा हो गया है।
ऑडिटर्स ने उठाए गंभीर सवाल
कंपनी की बैलेंस शीट पर ऑडिटर्स ने कई आपत्तियां दर्ज की हैं:
- अनकॉन्फर्म्ड एडवांसेज: करीब ₹63.46 करोड़ के एडवांसेज की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
- डिस्प्यूटेड एसेट्स: कंपनी ₹11.55 करोड़ के 247 जीरो कूपन ऑप्शनल कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (ZOCDs) को वापस पाने की कोशिश कर रही है, जो गलत तरीके से किसी बाहरी पार्टी को ट्रांसफर किए गए थे।
आगे की राह
कंपनी ने 24 जून, 2026 को डि-लिस्टिंग रोकने के लिए वेवर एप्लीकेशन दाखिल की है, जिसका फैसला आना अभी बाकी है। साथ ही, कंपनी ने लगातार दूसरे साल इंटरनल ऑडिटर की नियुक्ति नहीं की है, जो 'कंपनी एक्ट' के नियमों का उल्लंघन है। फिलहाल, पांच से भी कम कर्मचारियों के साथ काम कर रही इस कंपनी के निवेशकों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।
