Blue Coast Hotels: कंपनी को लगा **₹2.09 करोड़** का झटका, कानूनी उलझनें और कर्ज का भारी बोझ

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Blue Coast Hotels: कंपनी को लगा **₹2.09 करोड़** का झटका, कानूनी उलझनें और कर्ज का भारी बोझ

Blue Coast Hotels के FY26 के नतीजों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कंपनी को **₹2.09 करोड़** का नेट लॉस हुआ है, साथ ही SFIO जांच और IFCI के साथ चल रहे कानूनी विवादों ने कंपनी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

बिगड़ती आर्थिक सेहत

Blue Coast Hotels ने अपना FY 2025-26 का एनुअल रिपोर्ट जारी कर दिया है। कंपनी, जो अब प्रॉपर्टी ओनरशिप के बजाय हॉस्पिटैलिटी एडवाइजरी और कंसल्टेंसी का काम कर रही है, का रेवेन्यू ₹2.04 करोड़ पर सिमट गया है। कंपनी ने साफ शब्दों में 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) चेतावनी जारी की है, जिसका अर्थ है कि कंपनी की आर्थिक स्थिति काफी नाजुक है और नेगेटिव नेटवर्थ के कारण कामकाज जारी रखने में बड़ी चुनौतियां हैं।

डिफाल्ट और देनदारियों का बोझ

कंपनी ने 31 मार्च, 2026 तक प्रेफरेंस शेयर डिविडेंड के रूप में ₹4.85 करोड़ का डिफाल्ट किया है। इसके अलावा, ₹5.52 करोड़ के प्रेफरेंस शेयर्स का रिडेम्पशन भी नहीं हो पाया है, जो निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क फैक्टर है।

कानूनी शिकंजा और विवाद

  • IFCI विवाद: गोवा में पार्क हयात प्रॉपर्टी की बिक्री से जुड़े ₹85 करोड़ की रिकवरी के लिए कंपनी SAT (Securities Appellate Tribunal) में लड़ रही है।
  • SEBI सेटलमेंट: SEBI की जांच के बाद, कंपनी और उसके होल-टाइम डायरेक्टर ने जनवरी 2026 में क्रमशः ₹78 लाख और ₹11.37 लाख का सेटलमेंट शुल्क चुकाया है।
  • SFIO जांच: गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) की याचिका अभी भी पेंडिंग है, जो कंपनी के भविष्य पर एक बड़ा कानूनी खतरा (Legal Overhang) बना हुआ है।

आगे की राह

शेयरधारकों की नजरें अब आगामी 26 सितंबर, 2026 को होने वाली 33वीं AGM पर टिकी हैं। यहां SFIO पिटीशन के समाधान और कंपनी को उबारने की संभावित रणनीतियों पर स्पष्टता मिल सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.