Bil Vyapar Ltd गहरे वित्तीय संकट में घिरी हुई है और अब इसे Corporate Insolvency Resolution Process (CIRP) से गुजरना पड़ रहा है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए **₹0.03 करोड़** का नेट लॉस रिपोर्ट किया है, जिसके बाद अब इसे 'लिक्विडेशन बेसिस' पर रखा गया है।
NCLT में फंसी कंपनी
NCLT की कोलकाता बेंच द्वारा शुरू किए गए कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के बाद Bil Vyapar Ltd का पूरा कामकाज अब लिक्विडेशन-बेसिस पर शिफ्ट हो गया है। Punjab National Bank द्वारा IBC की धारा 7 के तहत दायर याचिका के बाद कंपनी का बोर्ड सस्पेंड कर दिया गया है और अब सारा मैनेजमेंट रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) सुश्री रचना झुनझुनवाला संभाल रही हैं।
ऑडिटर्स की कड़ी टिप्पणी
कंपनी के फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। हालांकि कुल आय ₹1.74 करोड़ रही, लेकिन नेट लॉस ₹0.03 करोड़ दर्ज किया गया। सबसे गंभीर बात यह है कि वैधानिक ऑडिटर्स ने 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' जारी किया है, क्योंकि वे कंपनी की संपत्ति और वित्तीय स्थिति को सत्यापित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं जुटा सके। यह स्थिति Edayar Zinc Ltd और BIL Infratech Ltd जैसी पूर्व सब्सिडियरी कंपनियों को दी गई कॉरपोरेट गारंटी से जुड़ी चिंताओं के बीच आई है।
क्यों बढ़ गया जोखिम?
कंपनी का संकट पुराना है, जिसमें अब तक कुल ₹217.66 करोड़ का घाटा जमा हो चुका है। वर्तमान में देनदारियां कुल एसेट्स से ₹186.28 करोड़ अधिक हैं। इसके अलावा, बिक्री के लिए रखी गई संपत्तियों पर मैनेजमेंट की रिपोर्ट गोपनीय रखी गई है, जिससे निवेशकों की पारदर्शिता पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।
