दिवाला प्रक्रिया (Insolvency Process) से गुजर रही Baron Infotech के लिए नई मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। NCLAT की चेन्नई बेंच ने 'स्टेटस-को' (Status Quo) ऑर्डर जारी किया है, जिससे कंपनी की रिजोल्यूशन प्रक्रिया में देरी होने की आशंका है।
कानूनी अड़चन और NCLAT का आदेश
Baron Infotech Limited की तीसरी मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक 6 अक्टूबर, 2026 को आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य केंद्र NCLAT चेन्नई बेंच का वह मौखिक आदेश था, जो 1 अक्टूबर, 2026 को आया था। इस कानूनी हस्तक्षेप की वजह एक असफल रिजोल्यूशन आवेदक, विवेक कुमार रत्कोंडा द्वारा दायर की गई अपील है।
निवेशकों के लिए क्या हैं जोखिम?
जब भी कोई कंपनी कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रिजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में होती है, तो 'स्टेटस-को' ऑर्डर का मतलब है कि फिलहाल पूरी प्रक्रिया थम गई है। जब तक अपीलीय प्राधिकरण मामले की सुनवाई नहीं करता, तब तक कोई भी आगे का कदम नहीं उठाया जा सकता। इससे रिजोल्यूशन प्लान को अंतिम रूप देने और कंपनी के पुनर्गठन या लिक्विडेशन की समय-सीमा पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
आगे क्या नजर रखें?
निवेशकों को अब BSE पर आने वाले आधिकारिक अपडेट्स पर पैनी नजर रखनी चाहिए। चूंकि मामला अभी 'सब-ज्यूडिस' (Sub-judice) है, इसलिए कंपनी की ओर से आने वाले एडमिनिस्ट्रेटिव खुलासे ही एकमात्र जरिया हैं, जिनसे यह पता चल सकेगा कि रिजोल्यूशन प्रक्रिया कब फिर से शुरू होगी या क्या आगे कोई और कानूनी बाधाएं आने वाली हैं।
