Astron Paper & Board Mill के लेनदारों की समिति (CoC) ने कंपनी के पुराने वित्तीय लेन-देन की जांच के लिए बड़ा कदम उठाया है। कंपनी के खिलाफ IBC की धारा 43 और 66 के तहत केस दर्ज करने की मंजूरी दी गई है, जिससे अब धोखाधड़ी और गड़बड़ियों की गहराई से पड़ताल होगी।
कानूनी शिकंजा और जांच का दायरा
Astron Paper & Board Mill की कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) ने अपनी चौथी बैठक में कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को हरी झंडी दे दी है। अब रेजोल्यूशन प्रोफेशनल अहमदाबाद स्थित NCLT में इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन दाखिल करेंगे। IBC की धारा 43 (प्रिफरेंशियल ट्रांजेक्शन) और धारा 66 (फ्रॉडुलेंट या गलत ट्रेडिंग) का उपयोग उन संपत्तियों का पता लगाने और उन्हें वापस पाने के लिए किया जाता है, जिन्हें दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने से पहले गलत तरीके से ट्रांसफर या हेरफेर किया गया था।
CIRP खर्चों को मिली मंजूरी
कानूनी लड़ाई के अलावा, कमेटी ने कंपनी की दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) से जुड़े ₹23,10,852 के खर्चों को भी मंजूरी दे दी है। इस प्रक्रिया में डेटा संरक्षण और जरूरी हार्डवेयर की खरीद शामिल है। इसके अलावा, सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) से 'बेनिफिशियल पोजीशन' (BENPOS) डेटा हासिल करने के लिए भी प्रशासनिक खर्चों को अनुमति दी गई है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
यह कदम कंपनी के कामकाज की गहन जांच की ओर इशारा करता है, जिसका उद्देश्य क्रेडिटर्स के लिए एसेट्स की रिकवरी को अधिकतम करना है। निवेशकों को अब NCLT की अगली सुनवाई और इन कानूनी आवेदनों पर अदालत के रुख पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि कंपनी का भविष्य इसी दिवालिया प्रक्रिया के नतीजों पर टिका है।
