Ashima Ltd ने आखिरकार HDFC Bank और Bank of Bahrain and Kuwait (BBK) के साथ चल रहे दो दशक पुराने कानूनी विवाद को सुलझा लिया है। इस सेटलमेंट के कारण कंपनी की जेब से **₹13.94 करोड़** नकद बाहर जाएंगे और प्रॉफिटेबिलिटी पर **₹9.83 करोड़** का वन-टाइम असर पड़ेगा।
दो दशक पुराने मामले का निपटारा
Ashima Ltd ने आखिरकार एक लंबे समय से चले आ रहे कानूनी विवाद को विराम दे दिया है। 22 अक्टूबर 2026 को कंपनी ने HDFC Bank और Bank of Bahrain and Kuwait (BBK) के साथ फॉर्मल 'कंसेंट टर्म्स' पर साइन किए हैं। इसके साथ ही Debt Recovery Appellate Tribunal (DRAT) मुंबई, DRT और अहमदाबाद की कमर्शियल कोर्ट में चल रहे कई केस अब बंद हो जाएंगे।
सेटलमेंट का वित्तीय असर (Financial Impact)
यह विवाद साल 2003 के एक ₹7.50 करोड़ के चेक ट्रांजैक्शन से जुड़ा था। नए समझौते के तहत, Ashima Ltd अब BBK को ₹18.00 करोड़ का भुगतान करेगी। वहीं, कंपनी को HDFC Bank में कोर्ट के आदेशों के तहत अटकी अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट से ₹4.06 करोड़ वापस मिलेंगे। इसका सीधा असर यह है कि कंपनी का नेट कैश आउटगो ₹13.94 करोड़ रहेगा, जबकि प्रॉफिट एंड लॉस (P&L) स्टेटमेंट पर लगभग ₹9.83 करोड़ का वन-टाइम चार्ज लगेगा।
आगे क्या होगा?
कंपनी अब कानूनी तौर पर सभी लंबित मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करेगी। सालों से बैलेंस शीट पर लटक रही यह 'लिगेसी लायबिलिटी' अब पूरी तरह साफ हो जाएगी, जिससे कंपनी के एडमिनिस्ट्रेटिव और कानूनी संसाधनों की बचत होगी। हालांकि, निवेशकों के लिए शॉर्ट टर्म में कैश रिजर्व पर पड़ने वाले दबाव और मुनाफे पर होने वाले असर पर नजर रखना जरूरी होगा।
