Alps Industries ने सफलतापूर्वक अपने NCLT-अप्रूव्ड रेजोल्यूशन प्लान को लागू कर दिया है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए **₹26.78 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो मुख्य रूप से कर्ज कम होने (Debt de-recognition) का नतीजा है।
क्या वाकई टर्नअराउंड है?
Alps Industries के लिए यह एक बड़ी तकनीकी जीत है। कंपनी ने पिछले साल जहां ₹63.99 करोड़ का भारी नुकसान झेला था, वहीं इस साल ₹26.78 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया है। लेकिन यहां एक 'कैच' है—यह मुनाफा कंपनी के कामकाज से नहीं, बल्कि ₹77.37 करोड़ के उन एक्सेप्शनल आइटम्स से आया है जो लायबिलिटीज (कर्ज) को राइट-ऑफ करने से मिले हैं।
बिजनेस की जमीनी हकीकत
बैलेंस शीट तो साफ हो गई है, लेकिन कंपनी का असली ऑपरेशन अभी भी संघर्ष कर रहा है। वित्त वर्ष में कंपनी की कुल इनकम केवल ₹0.16 करोड़ रही है। रेजोल्यूशन प्लान के तहत कंपनी के पुराने शेयरहोल्डर्स को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि पुरानी इक्विटी में 99% की कटौती की गई है। इसके अलावा, 7.30 करोड़ नए शेयर Securocorp Securities India Private Limited के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को जारी किए गए हैं। साथ ही, Edelweiss Asset Reconstruction Company Limited (EARCL) को 1 करोड़ प्रेफरेंस शेयर जारी किए गए हैं।
मैनेजमेंट में बदलाव और भविष्य की चुनौतियां
दिसंबर 2025 से कंपनी का पूरा बोर्ड बदल दिया गया है और रजिस्टर्ड ऑफिस नोएडा शिफ्ट हो चुका है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या नई मैनेजमेंट टीम इस कंपनी को जीरो रिवेन्यू से बाहर निकालकर एक सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल दे पाएगी? निवेशकों को अब कंपनी के ऑपरेशन्स में सुधार के संकेतों पर कड़ी नजर रखनी होगी।
