Aksh Optifibre: कंपनी पर लटकी दिवालियापन की तलवार, ₹13 करोड़ के घाटे से निवेशकों की बढ़ी टेंशन

OTHER
Whalesbook Corporate News Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
Aksh Optifibre: कंपनी पर लटकी दिवालियापन की तलवार, ₹13 करोड़ के घाटे से निवेशकों की बढ़ी टेंशन

Aksh Optifibre इस वक्त भारी संकट से गुजर रही है। NCLT के निर्देश पर कंपनी के खिलाफ कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू हो चुका है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कंपनी को **₹13.07 करोड़** का बड़ा नुकसान हुआ है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।

फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और संकट की स्थिति

कंपनी ने चालू फाइनेंशियल ईयर के दौरान ₹127.23 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, लेकिन इसके बावजूद कंपनी ₹13.07 करोड़ के घाटे में है। राहत की बात सिर्फ यह है कि पिछले साल यह घाटा ₹25.97 करोड़ था। फिलहाल जयपुर NCLT बेंच के 19 जून 2026 के आदेश के बाद कंपनी CIRP प्रक्रिया के दायरे में है। हालांकि, NCLAT ने IRP को फिलहाल आगे कोई सख्त कदम न उठाने का निर्देश दिया है, लेकिन कंपनी का कामकाज अब IRP की निगरानी में है।

क्यों बढ़ीं परेशानियां?

कंपनी के ऑडिटर्स ने कंपनी की बुक्स पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ऑडिटर्स के अनुसार, कंपनी ने ₹21.46 करोड़ का ब्याज और ₹8.40 करोड़ की ड्यूटी देनदारी को अपनी बैलेंस शीट में नहीं दिखाया है, जो कि करीब ₹29.86 करोड़ का बड़ा आंकड़ा है।

इसके अलावा, कंपनी कई मोर्चों पर कानूनी लड़ाई लड़ रही है:

  • Union Bank of India और HDFC Bank के साथ लोन रिकवरी के मामले चल रहे हैं।
  • Bank of Baroda ने कॉरपोरेट गारंटी को लेकर ₹69.44 करोड़ की डिमांड की है।

निवेशकों के लिए जोखिम

फिलहाल शेयरधारकों के लिए स्थिति काफी धुंधली है। सबसे बड़ा रिस्क CIRP का अंतिम नतीजा और बैंकों के साथ 'वन टाइम सेटलमेंट' (OTS) की सफलता पर टिका है। यदि इन विवादों का जल्द समाधान नहीं निकला, तो कंपनी के वैल्यूएशन पर भारी असर पड़ सकता है। निवेशकों को आने वाले दिनों में NCLT और NCLAT की सुनवाई पर पैनी नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.