दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) से गुजर रही Aksh Optifibre Limited ने अपनी 39वीं AGM पूरी कर ली है। कंपनी ने कानूनी औपचारिकताओं के तहत अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी है, लेकिन अभी भी पूरा कामकाज IRP की कड़ी निगरानी में है।
39वीं AGM: कानूनी औपचारिकताएं पूरी
28 सितंबर, 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में कंपनी ने वैधानिक अनुपालन के तहत अपने स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स को अपनाया। इसके अलावा, आगामी फाइनेंशियल ईयर के लिए कॉस्ट ऑडिटर के वेतन को मंजूरी दी गई और डॉ. कैलाश शांतिलाल चौधरी और मिस्टर सत्येंद्र कुमार गुप्ता को बोर्ड में फिर से नियुक्त किया गया।
IRP की निगरानी में कामकाज
भले ही AGM संपन्न हो गई हो, लेकिन कंपनी पर अब भी संकट के बादल छाए हैं। जून 2026 में NCLT के आदेश और NCLAT द्वारा 30 जून, 2026 को दिए गए निर्देशों के बाद, कंपनी का पूरा मैनेजमेंट अब एक 'इंटरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल' (IRP) की देखरेख में काम कर रहा है।
निवेशकों के लिए जोखिम और आगे की राह
मौजूदा स्थिति में कंपनी भारी वित्तीय पुनर्गठन (Financial Restructuring) के दौर से गुजर रही है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क 'रेजोल्यूशन प्लान' को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। NCLAT के सख्त दिशा-निर्देशों के कारण कंपनी की गवर्नेंस काफी जटिल हो गई है। भविष्य में स्टॉक की चाल और कंपनी की वैल्यूएशन पूरी तरह से NCLT और NCLAT की अगली फाइलिंग्स और फाइनल रेजोल्यूशन प्लान पर निर्भर करेगी।
