Aequs Limited के तीन सब्सिडियरी कंपनियों के साथ मर्जर के प्रस्ताव को मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (MCA) ने खारिज कर दिया है। कंपनी नियमों का पालन करने में विफल रही है, जिसके चलते अब मैनेजमेंट नए कानूनी रास्तों पर विचार कर रहा है।
क्या है मामला?
मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के रीजनल डायरेक्टर ऑफिस ने 12 अक्टूबर, 2026 को Aequs Limited और उसकी तीन सब्सिडियरी कंपनियों (AeroStructures Manufacturing India Private Limited, Aequs Engineered Plastics Private Limited, और Aequs Force Consumer Products Private Limited) के बीच विलय की योजना को रिजेक्ट कर दिया है।
क्यों हुआ रिजेक्शन?
यह फैसला 'कंपनी एक्ट' की धारा 233 के तहत प्रक्रियात्मक खामियों के कारण आया है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- मंजूरी की कमी: मर्जर के लिए जरूरी 90% शेयरहोल्डर मंजूरी की जगह कंपनी सिर्फ 88.9% ही हासिल कर पाई।
- दस्तावेजों में कमी: कंपनी सभी शेयरहोल्डर्स को दस्तावेज देने का प्रमाण नहीं दे सकी और BSE-NSE से जरूरी NOC भी नहीं जमा की गई।
- कानूनी पेच: ट्रांसफर करने वाली कंपनियों में से एक के खिलाफ लेबर कोर्ट में 7 मामले पेंडिंग हैं, जिसने रेगुलेटरी चिंताओं को और बढ़ा दिया।
आगे क्या होगा?
मैनेजमेंट का कहना है कि यह केवल एक इंटरनल रीस्ट्रक्चरिंग (Internal Restructuring) प्रक्रिया थी, इसलिए कंपनी के ऑपरेशंस पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। अब कंपनी या तो सभी नियमों को पूरा करते हुए दोबारा आवेदन करेगी या फिर 'कंपनी एक्ट' की धारा 232 के तहत नए कानूनी तरीके अपना सकती है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि इस कानूनी देरी से रीस्ट्रक्चरिंग की टाइमलाइन कितनी लंबी खिंचती है, क्योंकि सेक्शन 232 का रास्ता अपनाना ज्यादा लंबी और सख्त रेगुलेटरी प्रक्रिया हो सकती है।
