Aditya Forge: AGM में ऑडिट और नियमों में गंभीर खामियां, निवेशकों की बढ़ी चिंता

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AuthorAditya Rao|Published at:
Aditya Forge: AGM में ऑडिट और नियमों में गंभीर खामियां, निवेशकों की बढ़ी चिंता

Aditya Forge Ltd की 33वीं AGM में गवर्नेंस से जुड़ी बड़ी चिंताएं सामने आई हैं। इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट गायब होने और इनकम टैक्स लायबिलिटी के लिए फंड न रखने से कंपनी पर रिस्क बढ़ गया है।

AGM में क्यों मचा है हंगामा?

30 सितंबर, 2026 को वडोदरा में संपन्न हुई आदित्य फोर्ज की 33वीं सालाना आम बैठक (AGM) निवेशकों के लिए चौंकाने वाली रही। कंपनी के MD नितिन रसिकलाल पारेख की नियुक्ति जैसे एजेंडों के बीच, ऑडिटर्स ने फाइनेंशियल और रेगुलेटरी हेल्थ पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

क्यों है चिंता की बात?

ऑडिटर्स ने स्पष्ट किया है कि कंपनी के पास ट्रेड पेयबल्स और लोन जैसे जरूरी बैलेंस का वेरिफिकेशन करने के लिए पुख्ता डेटा नहीं है। सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि कंपनी ने चल रहे इनकम टैक्स विवाद के लिए कोई भी प्रोविजन (प्रावधान) नहीं किया है, जिससे भविष्य में बैलेंस शीट पर बड़ा असर पड़ सकता है।

गवर्नेंस में बड़ी चूक

  • इंटरनल ऑडिट का अभाव: फाइनेंशियल ईयर के दौरान कंपनी ने किसी भी इंटरनल ऑडिटर की नियुक्ति नहीं की थी।
  • रेगुलेटरी देरी: मैनेजमेंट ने माना है कि SEBI (LODR) नियमों के तहत फाइलिंग में देरी हुई है, जिसके लिए कंपनी को जुर्माना भी भरना पड़ा है।
  • डिमटेरियलाइजेशन की कमी: प्रमोटर की हिस्सेदारी का एक बड़ा हिस्सा अभी भी फिजिकल फॉर्म में है, जो नियमों के खिलाफ है।
  • UPSI का रिकॉर्ड नहीं: कंपनी अपने अनिवार्य सॉफ्टवेयर में 'अनपब्लिश्ड प्राइस सेंसिटिव इंफॉर्मेशन' (UPSI) की एंट्री रियल-टाइम में करने में विफल रही है।

अब क्या होगा?

कंपनी ने अपने रजिस्टर्ड ऑफिस को बदलने और रुता रोहनकुमार सोनी को नॉन-एग्जीक्यूटिव प्रोफेशनल डायरेक्टर नियुक्त करने की मंजूरी ले ली है। हालांकि, इन बदलावों के बीच कंपनी पर रेगुलेटर्स की नजरें टेढ़ी हो गई हैं। निवेशकों को सलाह है कि वे आगामी तिमाही अपडेट्स पर नजर रखें, खासकर टैक्स लायबिलिटी और इंटरनल ऑडिट की बहाली पर।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.