Aban Offshore अब औपचारिक रूप से कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में **₹28,386.86 मिलियन** का भारी-भरकम घाटा दर्ज किया है और ऑडिटर्स ने कंपनी के बैंक बैलेंस और कर्ज को लेकर 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' जारी किया है।
भारी घाटे की मार और अनिश्चितता
Aban Offshore के लिए संकट गहराता जा रहा है। कंपनी का कंसोलिडेटेड लॉस (Consolidated Loss) पिछले साल के ₹15,300.77 मिलियन से बढ़कर ₹28,386.86 मिलियन पर पहुंच गया है। वहीं, स्टैंडअलोन प्रॉफिट भी घटकर महज ₹316.83 मिलियन रह गया है, जो पिछले साल ₹1,678.20 मिलियन था।
क्या है बोर्ड और मैनेजमेंट की स्थिति?
NCLT के 1 सितंबर, 2025 के आदेश के बाद से बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की शक्तियां निलंबित कर दी गई हैं। अब पूरा कंट्रोल रेजोल्यूशन प्रोफेशनल, शैलेश देसाई के हाथों में है। कंपनी की 40वीं एनुअल जनरल मीटिंग 16 नवंबर, 2026 को तय की गई है।
ऑडिटर्स की चेतावनी (Auditor's Risk)
स्टेट्यूटरी ऑडिटर्स ने ₹592.98 मिलियन के बैंक बैलेंस और ₹4,148.03 मिलियन के कर्ज की पुष्टि न हो पाने पर गंभीर चिंता जताई है। ऑडिटर्स का मानना है कि कंपनी के 'गोइंग कंसर्न' बने रहने पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा है।
अब आगे क्या होगा?
इन्सॉल्वेंसी के कारण डिविडेंड बांटने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। हालांकि, कंपनी अपने रिग्स—Aban II, III और IV को किराए पर देकर रेवेन्यू जुटाने की कोशिश कर रही है। फिलहाल, कंपनी में कर्मचारियों की संख्या घटकर सिर्फ 26 रह गई है। निवेशकों को अब NCLT की अगली सुनवाई और रेजोल्यूशन प्लान के अपडेट पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
