Aarcon Facilities ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए कमजोर आंकड़े पेश किए हैं, जहां कंपनी का प्रॉफिट गिरकर **₹0.06 करोड़** पर आ गया है। मैनेजमेंट ने खराब फाइनेंशियल हेल्थ का हवाला देते हुए कई रेगुलेटरी चूक स्वीकार की हैं।
मुनाफे में बड़ी गिरावट और गवर्नेंस का संकट
कंपनी ने अपनी 33वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में FY26 के आंकड़े जारी किए, जो काफी निराशाजनक रहे हैं। कंपनी की टोटल इनकम पिछले साल के ₹1.04 करोड़ से घटकर इस साल मात्र ₹0.44 करोड़ रह गई है। वहीं, नेट प्रॉफिट भी आधा होकर ₹0.06 करोड़ रह गया है, जबकि पिछले साल यह ₹0.13 करोड़ था। कंपनी का कहना है कि उनकी कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते वे नियमों का पालन ठीक से नहीं कर पा रहे हैं।
क्यों है चिंता की बात?
सेक्रेटेरियल ऑडिट रिपोर्ट में कंपनी की पोल खुल गई है। इसमें खुलासा हुआ है कि कंपनी ने Companies Act, 2013 के नियमों के मुताबिक ऑडिट और नॉमिनेशन कमिटी तक नहीं बनाई है। इसके अलावा, BSE की लिस्टिंग फीस का भी केवल आंशिक भुगतान हुआ है और कंपनी SEBI SCORE प्लेटफॉर्म पर भी रजिस्टर नहीं है।
अब आगे क्या?
बोर्ड ने 20 जनवरी, 2026 से राजेंद्र एम. अग्रवाल को एडिशनल इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया है। अब 30 सितंबर, 2026 को होने वाली AGM में शेयरहोल्डर्स उनकी नियुक्ति और अनुपमा भरत गुप्ता की री-अपॉइंटमेंट पर वोट करेंगे।
निवेशकों के लिए रिस्क
गवर्नेंस के मोर्चे पर कंपनी अभी काफी पीछे है। जब तक लिस्टिंग फीस का पूरा भुगतान नहीं होता और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की भर्ती पूरी नहीं होती, तब तक रेगुलेटरी रिस्क बना रहेगा। निवेशकों को अगली AGM में मैनेजमेंट की रणनीति पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
