63 Moons Technologies ने BSE को एक अहम स्पष्टीकरण दिया है। कंपनी ने उन भ्रामक रिपोर्ट्स को खारिज किया है जिनमें NSEL केस में बॉम्बे हाई कोर्ट के किसी नए आदेश का दावा किया गया था। कंपनी के अनुसार, यह फैसला **18 महीने** पुराना है, जिसके कारण बाजार में असामान्य अस्थिरता देखी गई।
भ्रामक खबरों पर कंपनी का रुख
63 Moons Technologies ने 23 सितंबर, 2026 को एक्सचेंज को भेजी अपनी फाइलिंग में साफ किया है कि 22 सितंबर को सामने आई रिपोर्ट पूरी तरह से गलत है। इसमें NSEL मामले में MPID एक्ट के तहत किसी 'नए' फैसले का जिक्र किया गया था, जबकि हकीकत यह है कि वह जजमेंट 7 फरवरी, 2025 का है।
क्यों मचा बवाल?
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पुराने कानूनी दस्तावेजों को नए संदर्भ में पेश करने के कारण शेयर की कीमतों में इंट्रा-डे काफी उतार-चढ़ाव (Volatility) देखा गया। कंपनी का कहना है कि यह पुरानी रिपोर्ट दरअसल NSEL के ब्रोकरों से जुड़े अपील मामलों से संबंधित है, जिसका हालिया घटनाक्रम से कोई लेना-देना नहीं है।
आगे क्या कदम उठाएगी कंपनी?
63 Moons ने इस बात की पुष्टि की है कि वह इस पूरी घटना की जांच कर रही है कि आखिर यह पुरानी जानकारी गलत तरीके से क्यों फैलाई गई। कंपनी उन तत्वों के खिलाफ कानूनी और रेगुलेटरी कार्रवाई पर विचार कर रही है जो बाजार में मैनिपुलेशन के जरिए निवेशकों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी अनवेरिफाइड खबर पर भरोसा करने के बजाय BSE और NSE की आधिकारिक वेबसाइटों पर दी गई जानकारी पर ही भरोसा करें।
