TV Vision अब 'कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस' (CIRP) के दायरे में आ गई है। NCLT मुंबई के आदेश के बाद कंपनी के बोर्ड को सस्पेंड कर दिया गया है और अब पूरी कमान इंटरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल आलोक कुमार मुरारका के हाथों में है। कंपनी का फाइनेंशियल हाल बेहद खराब है और रेवेन्यू में **73.4%** की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस में भारी गिरावट
TV Vision के लिए यह फाइनेंशियल ईयर बेहद निराशाजनक रहा है। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू पिछले साल के ₹53.24 करोड़ से गिरकर इस साल मात्र ₹14.15 करोड़ पर आ गया है। इसके साथ ही, नेट लॉस भी पिछले साल के ₹26.69 करोड़ से बढ़कर ₹34.47 करोड़ हो गया है। EBITDA लॉस भी बढ़कर ₹19.39 करोड़ तक पहुंच गया है, जिसका सीधा असर प्रति शेयर कमाई (EPS) पर पड़ा है, जो अब -₹8.90 के स्तर पर है।
क्यों चिंता में हैं निवेशक?
अब कंपनी की कमान इंटरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) के पास है, जिसका मतलब है कि निर्णय लेने की शक्ति बोर्ड से छिन चुकी है। कंपनी की नेट वर्थ नेगेटिव हो चुकी है और मार्च 2026 तक कंपनी में केवल 5 कर्मचारी ही बचे थे, जो इसके सिमटते कामकाज को साफ बयां करता है।
ऑडिटर्स के गंभीर सवाल
स्टैच्यूटरी ऑडिटर ने कंपनी की बैलेंस शीट पर कई सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ी समस्या Punjab National Bank के क्लेम को लेकर है। बैंक का दावा ₹294.43 करोड़ का है, जबकि कंपनी की बुक्स में यह आंकड़ा सिर्फ ₹98.94 करोड़ दिखाया गया है। ऑडिटर के मुताबिक, कंपनी ने फाइनेंस कॉस्ट को कम से कम ₹26.16 करोड़ और देनदारियों को ₹195.50 करोड़ तक कम दिखाया है। इसके अलावा, GST इनपुट और वेंडर पेमेंट में भी बड़े विसंगतियां पाई गई हैं।
आगे क्या?
अब पूरा ध्यान 'कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स' की बैठकों और रेजोल्यूशन प्लान पर रहेगा। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क यह है कि रेजोल्यूशन प्रक्रिया के बाद कंपनी के शेयर की वैल्यू कितनी बचेगी या क्या उन्हें कोई रिकवरी मिल पाएगी। कंपनी ने इस साल कोई डिविडेंड नहीं देने का फैसला किया है।
