PVR Inox ने हालिया मीडिया रिपोर्ट्स में लगाए गए **₹200 करोड़** के कथित घूसखोरी स्कैम के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि थर्ड-पार्टी विशेषज्ञों के साथ की गई आंतरिक जांच में किसी भी तरह की गड़बड़ी के सबूत नहीं मिले हैं।
क्या है पूरा मामला?
PVR Inox Limited ने NSE और BSE को एक औपचारिक फाइलिंग भेजी है, जिसमें सितंबर 2026 की मीडिया रिपोर्ट में लगे ₹200 करोड़ के स्कैम के आरोपों को बेबुनियाद बताया गया है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि उन्हें अप्रैल 2026 में गुमनाम और अस्पष्ट शिकायतें मिली थीं। इसके बाद कंपनी ने बाहरी विशेषज्ञों (Third-party experts) की मदद से जांच की, जिसमें किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह सफाई?
इन आरोपों के कारण शेयर के भाव में भारी गिरावट देखी गई थी, जिससे निवेशकों में डर का माहौल था। कंपनी का यह कदम मार्केट में फैली अनिश्चितता को दूर करने और निवेशकों का भरोसा फिर से बहाल करने के लिए उठाया गया है। कंपनी ने साफ किया कि उनके इंटरनल गवर्नेंस और कंट्रोल सिस्टम पूरी तरह दुरुस्त हैं।
प्रमोद अरोड़ा के इस्तीफे पर स्थिति स्पष्ट
कंपनी ने अपने पूर्व कार्यकारी प्रमोद अरोड़ा के इस्तीफे पर भी उठ रहे सवालों का जवाब दिया। PVR Inox ने जोर देकर कहा कि 4 मई 2026 को उनका इस्तीफा पूरी तरह से निजी कारणों से था और इसका किसी भी तरह की जांच या दुराचार से कोई संबंध नहीं है। इस बदलाव की जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों को पहले ही दी जा चुकी थी।
आगे की राह और जोखिम
हालांकि कंपनी ने आरोपों को नकार दिया है, लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशकों को अभी भी सतर्क रहना चाहिए। मार्केट रेगुलेटर्स की तरफ से कोई भी फॉलो-अप पूछताछ या स्पष्टीकरण की मांग आने पर शेयर में हलचल हो सकती है। कंपनी की पारदर्शिता ही इस मामले में आगे की स्थिरता तय करेगी।
