Eros International Media की मुसीबतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कंपनी ने FY26 में **₹133.74 करोड़** का बड़ा नेट लॉस दर्ज किया है, जबकि पिछले साल कंपनी **₹115.02 करोड़** के मुनाफे में थी। कंपनी का रेवेन्यू भी गिरकर मात्र **₹29.40 करोड़** रह गया है, और ऑडिटर्स ने इसके 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) स्टेटस पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
बिगड़ी वित्तीय स्थिति
कंपनी की हालत कितनी खराब है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका कंसोलिडेटेड EBITDA ₹126.07 करोड़ के घाटे में चला गया है, जो पिछले साल ₹129.88 करोड़ का मुनाफा था। कंपनी का डाइल्यूटेड EPS (Earnings Per Share) गिरकर नेगेटिव ₹14.32 पर आ गया है। कंपनी की नेट वर्थ खत्म हो चुकी है और देनदारियां संपत्ति से कहीं अधिक हैं।
ऑडिटर्स की चेतावनी
सांख्यिकीय ऑडिटर्स ने कंपनी की बैलेंस शीट पर 'क्वालिफाइड ओपिनियन' दिया है। सबसे बड़ी चिंता ग्रुप की अन्य कंपनियों जैसे Eros Worldwide FZE और Eros International USA Inc से मिलने वाले बकाया पैसे (Receivables) को लेकर है। कंपनी ने ₹284.38 करोड़ का क्रेडिट लॉस प्रोविजन बनाया है। साथ ही, Colour Yellow Productions Private Limited का डेटा उपलब्ध न होने के कारण ऑडिटर्स उसे कंसोलिडेटेड अकाउंट्स में शामिल नहीं कर पाए हैं।
रेगुलेटरी और लीगल संकट
कंपनी पर SEBI की कार्रवाई पहले से ही जारी है, जिसे लेकर Eros International ने Securities Appellate Tribunal (SAT) में अपील की है। इसके अलावा, Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के तहत भी कंपनी के खिलाफ मामले दर्ज हैं। शेयर ट्रेडिंग पहले से ही सस्पेंडेड है, जिससे निवेशकों की लिक्विडिटी पूरी तरह फंस चुकी है।
आगे की राह
अब कंपनी की उम्मीदें पूरी तरह से अपनी फिल्म और म्यूजिक लाइब्रेरी को मोनेटाइज करने, गैर-जरूरी एसेट्स बेचने और ग्रुप एंटिटीज से पैसा वसूलने पर टिकी हैं। फिलहाल, कंपनी के भविष्य को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है।
