Diligent Media के नतीजे: मुनाफे से सीधे घाटे में!
Diligent Media Corporation ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के नतीजे जारी कर दिए हैं। पिछले साल जहाँ कंपनी को ₹13.62 करोड़ का शानदार प्रॉफ़िट (Profit) हुआ था, वहीं इस बार ₹8.88 करोड़ का नेट लॉस (Net Loss) सामने आया है। कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) में भी भारी गिरावट देखी गई है, जो पिछले साल के ₹13.19 करोड़ से लगभग 51% घटकर सिर्फ़ ₹6.51 करोड़ रह गया है। कंपनी की कुल संपत्ति भी ₹234.36 करोड़ से घटकर ₹190.86 करोड़ हो गई है।
शेयरधारकों के लिए चिंता की बात
नतीजों के साथ कंपनी के ऑडिट (Audit) पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। ऑडिटर M/s MGB & Co. LLP ने कंपनी के खातों पर 'क्वालिफाइड ओपिनियन' (Qualified Opinion) दिया है। इसकी वजह Inter Corporate Deposits (ICDs) और Non-Cumulative Non-Convertible Redeemable Preference Shares (NCRPS) से जुड़े एडजस्टमेंट्स में अनिश्चितता है। ऑडिटर ने यह भी कहा है कि कंपनी की गोइंग कंसर्न (Going Concern) यानी लगातार चलते रहने की क्षमता पर गंभीर सवाल हैं, जब तक कि डेट रिडक्शन स्कीम (Debt Reduction Scheme) को मंजूरी नहीं मिल जाती।
₹68.56 करोड़ का GST नोटिस और SEBI की कार्रवाई
वित्तीय नतीजों के अलावा, कंपनी पर ₹68.56 करोड़ की GST डिमांड का भारी बोझ है। इसके साथ ही, 12 फरवरी, 2026 को SEBI (Securities and Exchange Board of India) ने कंपनी को एक शो कॉज नोटिस (Show Cause Notice) भी जारी किया है। ये दोनों ही मामले कंपनी के लिए बड़े कानूनी और वित्तीय जोखिम पैदा कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में कंपनी ने ₹13.62 करोड़ का प्रॉफ़िट कमाया था, लेकिन इस बार नतीजे एकदम उलट रहे। यह मामला Veena Investments Private Limited (VIPL) के साथ ICDs और NCRPS को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है। आर्बिट्रेशन अवार्ड (Arbitration Award) ने सेट-ऑफ और रिडेम्प्शन/कैंसलेशन का निर्देश दिया है। इस विवाद से जुड़ी डेट रिडक्शन स्कीम को स्टॉक एक्सचेंजों से मंजूरी मिलनी बाकी है।
मैनेजमेंट में बदलाव और आगे क्या?
इन चुनौतियों से निपटने के लिए कंपनी ने Priyadarshan Garg को 1 जून, 2026 से नया CEO नियुक्त किया है। अब निवेशकों की नजरें कंपनी के डेट रिडक्शन स्कीम पर स्टॉक एक्सचेंज की मंजूरी, GST डिमांड और SEBI नोटिस से जुड़े कानूनी मामलों के नतीजों और नए मैनेजमेंट की रणनीति पर टिकी रहेंगी। कंपनी की नेगेटिव नेट वर्थ (Negative Net Worth) और ऑडिट पर लगे सवाल कंपनी के भविष्य के लिए बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं।
