Zicom Electronic Security Systems की इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया में एक नया मोड़ आ गया है। NCLAT ने फाइनेंशियल क्रेडिटर्स के बीच होने वाले **₹16 करोड़** के वितरण पर तब तक रोक लगा दी है जब तक IDBI Bank की अपील पर फैसला नहीं आ जाता।
क्या है पूरा विवाद?
Zicom Electronic Security Systems फिलहाल कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजर रही है। हाल ही में IDBI Bank ने उस निर्देश को चुनौती दी थी, जिसके तहत रेजोल्यूशन प्रोफेशनल को ₹16 करोड़ की राशि फाइनेंशियल क्रेडिटर्स में बांटनी थी। यह निर्देश इसलिए दिया गया था ताकि असहमत (dissenting) क्रेडिटर्स को उनकी सिक्योरिटी के लिक्विडेशन वैल्यू के बराबर भुगतान मिल सके।
क्यों बढ़ गई अनिश्चितता?
NCLAT ने साफ कर दिया है कि इस ₹16 करोड़ के वितरण से जुड़ा कोई भी फैसला अब अपील के अंतिम नतीजे पर निर्भर करेगा। ट्रिब्यूनल ने यह भी आदेश दिया है कि कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) के सभी मेंबर्स को इस केस में प्रतिवादी (respondent) बनाया जाए, जिससे मामले का दायरा और बढ़ गया है। कोर्ट के अगले आदेश तक यह वितरण प्रक्रिया पूरी तरह से फ्रीज हो गई है।
आगे क्या होगा?
इस कानूनी उलझन के चलते कंपनी की इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन की समय-सीमा और खिंच सकती है। अब सभी की निगाहें 18 नवंबर, 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस तारीख तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि वितरण का पुराना प्लान लागू रहेगा या फिर से गणना की जाएगी, जो क्रेडिटर्स की रिकवरी को सीधे प्रभावित करेगा।
