Vikram Solar लिमिटेड को बड़ा झटका लगा है। NCLT कोलकाता ने कंपनी के खिलाफ दिवालियापन (Insolvency) की अर्जी स्वीकार कर ली है। यह अर्जी Isitva Steels ने दायर की थी।
NCLT का फैसला
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) कोलकाता बेंच ने विक्रम सोलर लिमिटेड के खिलाफ एक कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) एप्लीकेशन को स्वीकार कर लिया है। यह एप्लीकेशन इस्त्वा स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड (ISPL) द्वारा दायर की गई थी, जिसमें कंपनी पर ₹9.44 करोड़ के बकाया होने का आरोप लगाया गया है।
कंपनी का पक्ष
विक्रम सोलर ने इस दावे का पुरजोर विरोध किया है। कंपनी का कहना है कि यह मामला 2018 में आंध्र प्रदेश में एक सोलर ईपीसी प्रोजेक्ट के लिए सब-कॉन्ट्रैक्ट किए गए सिविल कामों से जुड़ा है। कंपनी ने यह भी बताया कि ISPL के साथ 7 दिसंबर, 2019 को ही फुल एंड फाइनल सेटलमेंट एग्रीमेंट हो चुका था, और इसलिए ₹9.44 करोड़ का यह दावा गलत है।
आगे क्या?
इस NCLT ऑर्डर के खिलाफ विक्रम सोलर नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में अपील दायर कर रही है। कंपनी का लक्ष्य शेयरधारकों के हितों की रक्षा करना है। इस बीच, सुश्री तृप्ति अग्रवाल को इंटरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) नियुक्त किया गया है।
जोखिम और संभावनाएँ
NCLAT में अपील का नतीजा इस मामले में सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है। अगर अपील खारिज होती है, तो कंपनी के ऑपरेशन और मार्केट पोजीशन पर असर पड़ सकता है। हालांकि, कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में ₹4,802.25 करोड़ का रेवेन्यू और ₹470.42 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया है। कंपनी पर कोई लॉन्ग-टर्म डेट नहीं है और डेट-टू-इक्विटी रेशियो सिर्फ 0.03 है, जो कि एक मजबूत वित्तीय स्थिति दर्शाता है।
