विक्रम सोलर पर इन्सॉल्वेंसी का साया, कंपनी ने NCLT के फैसले को दी चुनौती

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AuthorNeha Patil|Published at:
विक्रम सोलर पर इन्सॉल्वेंसी का साया, कंपनी ने NCLT के फैसले को दी चुनौती

सौर ऊर्जा कंपनी विक्रम सोलर लिमिटेड (Vikram Solar Ltd) एक बड़ी मुश्किल में फंस गई है। इस्तिवा स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड (Isitva Steels Private Limited) ने कंपनी के खिलाफ इंसॉल्वेंसी (insolvency) की अर्जी दायर की है, जिसमें **9.44 करोड़ रुपये** के बकाया का दावा किया गया है। हालांकि, विक्रम सोलर इस दावे को गलत बता रही है और कह रही है कि **2019** में ही सेटलमेंट हो चुका था। कंपनी अब NCLT के ऑर्डर के खिलाफ अपील करने जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), कोलकाता बेंच ने विक्रम सोलर लिमिटेड के खिलाफ इंसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड (IBC) की धारा 9 के तहत दायर एक अर्जी को स्वीकार कर लिया है। यह अर्जी इस्तिवा स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड ने 9.44 करोड़ रुपये के कथित बकाया दावों को लेकर दाखिल की थी।

क्यों है यह महत्वपूर्ण?

इन्सॉल्वेंसी की अर्जी का स्वीकार होना, भले ही विवादित हो, शेयरधारकों के लिए बड़ी अनिश्चितता पैदा करता है। इससे कंपनी की वित्तीय सेहत और भविष्य की पुनर्संरचना को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं। हालांकि, विक्रम सोलर का कहना है कि 2019 में इस मामले का पूर्ण और अंतिम निपटारा (settlement) हो चुका था और कंपनी NCLT के फैसले को सक्रिय रूप से चुनौती दे रही है।

पृष्ठभूमि

यह विवाद 2018 में सब-कॉन्ट्रैक्ट पर दिए गए सिविल कार्यों से जुड़ा है। विक्रम सोलर के प्रबंधन ने कहा है कि इस मामले का खुलासा कंपनी के 21 अगस्त, 2025 के प्रॉस्पेक्टस में किया गया था। कंपनी का मैनेजमेंट अब NCLT के फैसले के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में अपील करने की तैयारी कर रहा है।

अब क्या बदलेगा?

NCLT के 12 जून, 2026 के आदेश के बाद, अंतरिम समाधान पेशेवर (Interim Resolution Professional) के तौर पर सुश्री तृप्ति अग्रवाल की नियुक्ति की गई है। कंपनी का दावा है कि वह पूरी तरह सॉल्वेंट (solvent) है, और इसे लेंडर्स (lenders) से मिले कन्फर्मेशन से भी बल मिलता है कि उनके खाते 'स्टैंडर्ड और रेगुलर' के तौर पर वर्गीकृत हैं।

जोखिमों पर नज़र

निवेशक NCLAT में अपील के नतीजों पर बारीकी से नज़र रखेंगे। कोई भी प्रतिकूल फैसला कंपनी के संचालन और वित्तीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। लंबे कानूनी विवाद की संभावना जोखिम को और बढ़ाती है।

तुलनात्मक स्थिति

हालांकि फाइलिंग में विशेष पीयर (peer) डेटा प्रदान नहीं किया गया है, इंसॉल्वेंसी की कार्यवाही एक कंपनी को स्थिर वित्तीय स्थिति वाले प्रतिस्पर्धियों की तुलना में नुकसान की स्थिति में डाल सकती है।

वित्तीय आंकड़े (Context Metrics)

वित्तीय वर्ष 2026 (31 मार्च, 2026 को समाप्त) के अनुसार, विक्रम सोलर ने 4,802.25 करोड़ रुपये का कुल राजस्व (Total Revenue) और 470.42 करोड़ रुपये का टैक्स के बाद लाभ (Profit-after-tax) दर्ज किया था। कंपनी का वर्किंग कैपिटल नेट डेट (Working Capital Net Debt) 64 करोड़ रुपये था, और डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) काफी कम, 0.03 था। FY2026 में नेट वर्किंग कैपिटल साइकिल सुधरकर 44 दिन हो गया, जो FY2025 के 82 दिनों की तुलना में परिचालन दक्षता (operational efficiency) में सुधार का संकेत देता है।

आगे क्या देखें?

NCLAT में अपील की कार्यवाही और कंपनी या अंतरिम समाधान पेशेवर से किसी भी आगे की घोषणाओं पर ध्यान केंद्रित करें। साथ ही, कंपनी के चल रहे संचालन और फाइनेंसिंग पर किसी भी प्रभाव पर नज़र रखें।

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