Tata Chemicals पर गिरी गाज: गुजरात हाई कोर्ट ने दिए जांच के आदेश
गुजरात हाई कोर्ट ने पुरानी खुली वेस्टवाटर (wastewater) चैनलों के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने का आदेश दिया है।
क्या हुआ?
गुजरात हाई कोर्ट ने Tata Chemicals के उस दावे को खारिज कर दिया है कि 1987 से पहले की पुरानी खुली वेस्टवाटर चैनलों वाली जमीन पर उसका पूर्व-मौजूदा अधिकार है। कोर्ट ने गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) को विशेषज्ञों की नियुक्ति करने का निर्देश दिया है ताकि पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन किया जा सके और किसी भी आवश्यक सुधार या मुआवजे पर निर्णय लिया जा सके।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
हालांकि Tata Chemicals ने पुष्टि की है कि उसके मौजूदा ऑपरेशन्स में एक बंद डीप-सी वेस्टवाटर डिस्चार्ज पाइपलाइन का उपयोग होता है और वह सभी नियमों का पालन करती है, कोर्ट के इस आदेश से भविष्य में वित्तीय देनदारियों की संभावना पैदा हो गई है। पुरानी चैनलें अब उपयोग में नहीं हैं। यह आकलन, जो अगले तीन महीनों के भीतर पूरा होना है, किसी भी आवश्यक सुधार या मुआवजे के दायरे को स्पष्ट करेगा।
बैकस्टोरी
यह मामला 1987 से पहले संचालित होने वाली पुरानी खुली वेस्टवाटर चैनलों से संबंधित है। कोर्ट ने प्रभावित भूमि पर Tata Chemicals के पूर्व-मौजूदा अधिकारों के दावे को खारिज कर दिया।
अब क्या बदलेगा?
अगले तीन महीनों के भीतर एक विशेषज्ञ के नेतृत्व में पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन शुरू होगा। यह मूल्यांकन कंपनी के लिए संभावित वित्तीय निहितार्थों को निर्धारित करेगा।
किन जोखिमों पर नजर रखें?
मुख्य जोखिम यह है कि यदि प्रभाव आकलन में महत्वपूर्ण पर्यावरणीय क्षति का पता चलता है, तो सुधार या मुआवजे की अज्ञात वित्तीय लागत।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को पर्यावरणीय प्रभाव आकलन की प्रगति और निष्कर्षों के साथ-साथ GPCB या हाई कोर्ट से भविष्य के किसी भी निर्देश पर नजर रखनी चाहिए।
